अपने आपको रोक ना पाई

Apne aap ko rok na payi:

antarvasna, hindi sex stories मैं अपने पति के साथ जयपुर से दिल्ली के लिए जा रही थी हम लोगों को दिल्ली जाना था क्योंकि दिल्ली में ही मेरा ससुराल है। हम लोग बस स्टॉप पर बैठे हुए थे क्योंकि हम लोगों ने ऑनलाइन बस में टिकट करवाई थी, बस जिस रास्ते से जाती है उस रास्ते पर ही हमारा घर है और हमारे घर से कुछ ही दूरी पर बस स्टॉप था इस वजह से हम लोगों ने वहीं से बैठना ठीक समझा। मेरी शादी को 4 वर्ष हो चुके हैं और मेरा एक छोटा बच्चा है जिसकी उम्र एक वर्ष है, मेरा बच्चा बहुत ज्यादा रोने लगा मैंने अपने पति से कहा आज यह इतना क्यों रो रहा है तो वह कहने लगे शायद उसे भूख लग गई होगी तुम उसे दूध पिला दो। मैंने अपने बैंक से दूध की बोतल निकाली और उसे दूध पिला दिया वह थोड़ी देर बाद सो गया और हम दोनों वहीं बैठे हुए थे, वहां पर कुछ और लोग भी बैठे हुए थे मेरे पति ने बस के कंडक्टर को फोन किया तो वह कहने लगा सर हम लोग कुछ देर बाद पहुंच रहे हैं आप लोग वही पर रहे।

बस 10 मिनट बाद वहां पहुंच गई हम लोग बस में बैठे और हम लोगों ने अपना सारा सामान रख लिया मैं और मेरे पति अपनी सीट पर जाकर बैठ गए क्योंकि रात का वक्त था इसलिए कनेक्टर ने लाइट को बुझा दिया और सब लोग बस में सो गए, मुझे भी बहुत गहरी नींद आने लगी क्योंकि सुबह से मैं बहुत ज्यादा थक चुकी थी सुबह से मैं घर का सारा काम कर रही थी और मैंने पैकिंग भी सुबह के वक्त ही की थी इसीलिए मुझे बहुत ज्यादा थकान महसूस हो रही थी, जब मैं सो गई तो मैंने अपने पति से कहा कि तुम थोड़ी देर बच्चे को पकड़ लो, मेरे पति ने बच्चे को पकड़ा हुआ था हम दोनों बहुत गहरी नींद में सो गए थे थोड़ी देर बाद बच्चा जोर जोर से रोने लगा बस में सब लोग उठ गए मैंने बच्चे को चुप कराया और उसके बाद मुझे नींद ही नहीं आई, हम लोग जब सुबह के वक्त दिल्ली पहुंच गए तो हम लोगों ने वहां से ऑटो किया और उसके बाद हम लोग घर की तरफ को निकल पड़े, हम लोग घर चले गए, वहां से हम लोग जब घर पहुंचे तो मेरी सास हम दोनों को देखकर बहुत खुश हो गई क्योंकि हम लोग करीब 6 महीने बाद घर आये थे। वह मुझसे कहने लगी बेटा तुम कैसी हो? मैंने उन्हें कहा मम्मी मैं तो ठीक हूं आप बताइए आपकी तबीयत कैसी है, वह कहने लगी बस तबीयत तो ठीक ही है तुम लोगों के घर में आने से तबियत बहुत ही खुश हो जाती है।

मैंने मम्मी से कहा मैं तो आप लोगों के साथ ही रहना चाहती हूं लेकिन इनकी जॉब की वजह से मुझे उनके साथ रहना पड़ता है, मम्मी कहने लगी कोई बात नहीं बेटा हम लोग अभी अपनी देखभाल कर सकते हैं, मेरे ससुर जी अपनी जॉब पर जाने के लिए तैयारी कर रहे थे मुझे तो बहुत तेज नींद आ रही थी क्योंकि मैं रात भर से सोई नहीं थी मैंने सोचा कि पहले मैं फ्रेश हो जाती हूं उसके मैं सो जाऊंगी, मैं फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चली गई फ्रेश होकर मैं नहाने के लिए गई उसके बाद मैं अपने रूम में लेटी हुई थी और मुझे बहुत गहरी नींद आ गई मेरी आंख लग गई और जब मेरी आंख खुली तो उस वक्त 4:00 बज चुके थे मैं जब उठी तो मैंने अपने पति को देखा वह मेरे बगल में बैठे हुए थे और किसी से फोन पर बात कर रहे थे उन्होंने जब फोन रखा तो मैंने उनसे कहा आपने मुझे उठाया क्यों नहीं मुझे बहुत गहरी नींद आ गई थी, वह कहने लगे मुझे भी लग रहा था कि तुम बहुत थक चुकी हूं इसलिए मैंने तुम्हें नहीं उठाया। हम दोनो आपस में बात करने लगे मेरे पति मुझे कहने लगे कि तुम मेरे लिए चाय बना देना और मम्मी के लिए भी चाय बना देना शायद मम्मी भी अपने रूम में लेटी हुई है, मैं किचन में चली गई और चाय बनाने लगी, मैं जब चाय बना रही थी तभी मेरी एक सहेली का फोन मुझे आ गया वह भी दिल्ली में रहती है वह मुझे कहने लगी शीतल तुम कैसी हो? मैंने उसे कहा मैं तो ठीक हूं तुम सुनाओ तुम कैसी हो, वह कहने लगी मैं भी ठीक हूं मैंने उसे नहीं बताया कि मैं दिल्ली आई हुई हूं नहीं तो वह मुझसे मिलने की जिद करती, वह मुझसे पूछने लगी कि तुम अभी कहां हो, मैंने उसे कहा मैं तो जयपुर में ही हूं।

मैं उसे बताना ही नहीं चाहती थी कि मैं दिल्ली आई हुई हूं, वह मुझसे कहने लगी तुम्हारे पति कैसे हैं? मैंने उसे कहा बस ठीक हैं तुम सुनाओ आजकल तुम्हारा क्या चल रहा है तो वह कहने लगी बस कुछ नहीं मैंने अपना बुटीक खोला है मैंने तुम्हें इसीलिए फोन किया था की जब तुम्हे दिल्ली आने का समय मिले तो तुम मेरे बुटीक पर आ जाना, मैंने उसे कहा ठीक है मैं शायद कुछ दिनों बाद दिल्ली आऊंगी तो मैं तुम्हारे बुटीक पर जरूर आऊंगी, वह कहने लगी तुम जरूर मेरे बुटीक में आना,  मैंने जो खुद से कहा कि मैं तुम्हारे बुटीक पर जरूर आऊंगी तो वह मुझे कहने लगी तुम जब भी आओगी तो मुझे फोन कर के आना। मैंने फोन रख दिया था तब तक चाय भी बन चुकी थी हम लोगों ने उस दिन साथ में बैठकर चाय पी काफी समय बाद ऐसा मौका मिला था जब हम लोगों ने साथ में बैठकर चाय पी थी और मैं अपने पति से कहने लगी कि मुझे नंदिनी का फोन आया था वह मुझे अपने पास बुला रही थी लेकिन मैंने उसे अभी यह बात नहीं बताई कि मैं दिल्ली आई हुई हूं नहीं तो वह घर पर ही आ जाती, मेरे पति कहने लगे कोई बात नहीं तुम उससे मिलने के लिए चले जाना वैसे भी हम लोग अभी कुछ दिनों तक तो दिल्ली में ही हैं। मेरे पति ने दो महीने की छुट्टी ली थी मेरे पति की सरकारी नौकरी है इसलिए उन्होंने एक साथ ही दो महीने की छुट्टी ले ली थी वह काफी समय तक घर में रहना चाहते थे।

मैं कुछ दिनों बाद अपनी सहेली से मिलने के लिए उसके बुटीक में चली गई, मैं जब उसके बुटीक पर गई तो उसने बुटीक तो बहुत अच्छा खोला था मैंने उसे बधाई देते हुए कहा तुमने तो काफी अच्छा बुटीक खोल लिया है, वह कहने लगी इसमें मेरी बहन ने मेरा काफी साथ दिया उसने ही मुझे यह सब खोलने के लिए पैसे दिए थे, मैंने उससे कहा चलो यह सब तो अच्छा हुआ कि तुम्हारी बहन ने तुम्हें पैसे दिए क्योंकि तुम्हें भी एक प्लेटफार्म मिल गया, वह कहने लगी हां पहले तो मैंने घर पर ही छोटा सा बुटीक खोला था लेकिन अब मेरे बड़ा बुटीक खोलने से यहां पर काफी कस्टमर आने लगे हैं। मैं और मेरी सहेली साथ में बैठे हुए थे हम लोग अपने पुराने दिन की बातें याद करने लगे वह मुझे कहने लगी कि हम लोग कॉलेज में कितनी मस्ती किया करते थे, मैंने उससे कहां तुम कह तो सही रही हो लेकिन अब तो शायद इन सब चीजों के लिए समय ही नहीं मिल पाता, मैं तो अपने जीवन में जैसे बिजी हो गई हूं, वह कहने लगी तुम भी कुछ काम क्यों नहीं कर लेती, मैंने उसे कहा बच्चे की वजह से मुझे दिक्कत है इसलिए मैं कोई काम नहीं कर सकती। मैं जब वहां से बाहर निकली तो मैं ऑटो का वेट करने लगी और वहीं बाहर पर खड़ी हो गई लेकिन मुझे ऑटो ही नहीं मिल रहा था। मैंने देखा कोई व्यक्ति मुझे अपनी कार से आवाज लगा रहा है मुझे समझ नहीं आया कि वह कौन है लेकिन जब उसने अपनी कार का दरवाजा खोला तो वह मेरे भाई का दोस्त था जो कि अक्सर हमारे घर पर आता था उसका नाम ललित है। वह मुझे आवाज देकर कहने लगा तुम कार में आ जाओ मैं जल्दी से कार की तरफ चली गई मैं ललित के साथ कार में बैठ गई। ललित कहने लगा तुम यहां कैसे मैंने उसे बताया कि यहां मेरी दोस्त ने बूटीक खोला है मैं उसे ही मिलने आई थी। ललित कहने लगा इतने वर्षों बाद भी तुम्हें देखकर ऐसा नहीं लगा कि तुम बिल्कुल बदली हो तुम आज भी उतनी ही सुंदर हो जितनी पहले थी। ललित मेरी सुंदरता की तारीफ कर रहा था वह अपनी नजरों से मेरी तरफ देख रहा था ललित ने मुझे अपनी बातों में फंसा लिया। वह मुझे अपने साथ ले गया मैं भी उसका विरोध नहीं कर पाई क्योंकि शायद मैं भी चाहती थी कि मैं किसी अन्य पुरुष के साथ संबंध बनाऊ।

हम दोनों एक होटल में चले गए मैंने कभी सोचा नहीं था कि ललित के साथ मैं शारीरिक संबंध बना पाऊंगी लेकिन उसकी कद काठी और उसका शरीर देखकर मेरा मन पूरी तरीके से फिसल गया। जब हम दोनों रूम में गए तो ललित ने मेरे होठों को चुसना शुरू किया और मेरे अंदर गर्मी पैदा कर दी। मैंने भी ललित के लंड को हिलाते हुए अपने मुंह के अंदर ले लिया और उसके लंड को सकिंग करने लगी उसे भी बड़ा मजा आने लगा। वह कहने लगा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मैंने उसके सामने अपने दोनों पैरों को खोल लिया और जैसे ही ललित ने अपने लंड को मेरी योनि में डाला तो मुझे एक अजीब सी फीलिंग गई मेरे अंदर से करंट निकलने लगा। उसका लंड मेरी चूत की गहराइयों में जा चुका था उसका लंड बड़ा ही लंबा था वह मेरी चूत के पूरे अंदर तक जा रहा था। जब उसने अपने लंड को मेरी चूत के अंदर बाहर करना शुरू किया तो मुझे भी मजा आने लगा वह बहुत तेजी से ऐसा करने लगा। मैं उसका पूरा साथ देने लगी और अपने पैरों को चौड़ा करने लगी। वह मुझे कहने लगा आज तो तुम्हारे साथ सेक्स कर के मजा आ गया मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि तुम्हारे साथ मैं संभोग कर पाऊंगा। मैंने भी ललित से कहा मैंने भी कभी सोचा नहीं था हम दोनों ने करीब 5 मिनट तक एक दूसरे के साथ सेक्स किया लेकिन उस दिन मुझे घर जाना था इसलिए मैंने ललित से कहा मुझे तुम घर छोड़ दो। मैं वहां से घर चली गई रात भर मेरे दिमाग में सिर्फ यही ख्याल चलता रहा वह जब भी मुझे फोन करता तो मैं अपने आपको उससे मिलने से नहीं रोक पाती।


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