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बड़ी गलती और बड़ा लंड़

Badi galti aur bada lund:

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मेरा नाम राजन है और मैं बनारस का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 25 साल है। अब मैं जॉब करने लगा हूं। जिससे मेरे घर में आर्थिक रुप से थोड़ा बहुत मदद मिल जाती है और मैं अपने खरचे खुद ही उठा लेता हूं। मुझे बहुत ही अच्छा लगता है जब मैं अपने पिताजी को कुछ पैसे देता हूं। क्योंकि उन्होंने बड़ी ही तंगी में शुरुआत की थी। मुझे अभी  तक पता है वह किस तरीके से मेरे स्कूल की फीस को भरा करते थे। मैं सब देखता रहता था लेकिन कुछ भी नहीं कर सकता था। उस समय हम लोग बहुत ही छोटे थे। मेरे घर में मेरे दो छोटे भाई हैं। मेरे चाचा भी पहले हमारे साथ ही रहते थे और इनकी एक लड़की है। अब उसकी उम्र भी 23 साल की हो चुकी है और वह कॉलेज कर रही है। पहले मेरे पिताजी और चाचा जब साथ में रहते थे तो वह बड़ी मुश्किल से हमारे घर का खर्चा चला पाते थे। उन दोनों ने बहुत मेहनत की जिससे कि हम सब को पढ़ा सके। जब मैं बारहवीं में था तो तब मेरे चाचा दूसरे शहर नौकरी करने के लिए चले गए और अपने परिवार को अपने साथ ही ले गए। वहां वह भी बहुत अच्छा काम करने लगे हैं और उनका काम अच्छे से चलने लगा है लेकिन हमारे चाचा दोबारा बनारस वापस लौट आए हैं। अब वह कहने लगे हैं कि पारुल को बनारस में ही आगे की पढ़ाई करवाएंगे। उसका ग्रेजुएशन पूरा हो चुका है। अब बाकी की पढ़ाई बनारस में ही उसे करवाना चाहते हैं और उन्होंने मेरे पिताजी से भी इस बारे में बात की।

मेरे पिताजी कहने लगे यह तुम्हारा ही घर है तुम्हें जब इच्छा हो तब तुम आकर यहां रह सकते हो लेकिन शायद अब मेरी चाची अलग रहना चाहती है। क्योंकि उन्हें अलग ही रहना पसंद है। उन्हें कई सालों से अब अकेले रहने की आदत हो चुकी है। इसलिए वह नहीं चाहती कि अब हम साथ में रहें। इसलिए मेरे चाचा ने मेरे पिताजी को कहा कि हमने पास में ही एक छोटा सा घर खरीदने की सोची है। मेरे पिताजी कहने लगे कोई बात नहीं तुम वहीं पर घर ले लो। अब उन्होंने वही पास में ही एक घर ले लिया है और मेरे चाचा हमारे घर भी आते रहते हैं।  कभी कबार मेरी चाची भी आ जाती है। पारुल के साथ हमें भी बहुत अच्छा लगता है, जब वह लोग हमारे घर आते हैं लेकिन अब मैं अपने काम में व्यस्त रहता हूं। इसलिए मैं उन लोगों से मिल नहीं पाता और जिस दिन मेरी छुट्टी होती है उस दिन मैं अपने काम में ही बिजी रह जाता हूं। क्योंकि मुझे एक भी छुट्टी नही मिलती है। उसमे मेरे बहुत सारे काम होते हैं। मैं उन्हें ही निपटाने में व्यस्त रहता हूं। इसलिए मैं उन्हें मिल नहीं पाता हूं। जब मेरी  छुट्टी  थी तो मेरे पिताजी ने कहा कि तुम अपने चाचा के घर चले जाना। अब मैं अपने चाचा के घर चला गया। वहां मैं अपनी चाची से काफी सारी बातें करने लगा।

वह मुझसे पूछने लगे, तुम्हारा काम कैसा चल रहा है। मैंने उन्हें बताया कि मेरा काम बहुत अच्छा चल रहा है। तभी पारुल भी आ गई और वह मुझे कहने लगी, तुम तो हमारे घर आते ही नहीं हो। मैंने उसे कहा कि मुझे टाइम ही नहीं होता है। इस वजह से मैं तुम्हारे घर आ नहीं सकता। नहीं तो आने की मैं भी सोचता हूं लेकिन समय की कमी के चलते मेरा आना संभव नहीं हो पाता है। मैंने भी पारुल से पूछा तुम क्या कर रही हो। वो कहने लगी मैं अभी पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हूं। उसके बाद आगे देखती हूं। अभी तक तो मैंने कुछ सोचा नहीं है। मेरी चाची कहने लगी तुम हमारे घर आ जाया करो जब भी तुम्हारी छुट्टी होती है। मैंने उन्हें कहा जी बिल्कुल जब भी मेरे पास समय होगा तो मैं आ जाऊंगा और वह भी कहने लगी कि मैं भी तुम्हारे घर अगले हफ्ते तुमसे मिलने आ जाऊंगी। मैंने पारुल को कहा ठीक है। तुम अगले हफ्ते आ जाना। उस दिन मेरी छुट्टी होगी हम लोग बहुत ही इंजॉय करेंगे। ऐसे ही एक हफ्ता बीत गया और अगले हफ्ते पारुल हमारे घर आ गई। वह मेरे पिताजी से मिली और उनको नमस्ते करने के बाद वह मुझसे आकर गले मिल गई।

अब हम लोग अपने रूम में बैठे रहे और हम लोग काफी इंजॉय कर रहे थे। मेरे दोनों भाई भी साथ में ही थे। वह भी बहुत मजे कर रहे थे। बहुत समय बाद ऐसा हुआ होगा जब हम साथ में बैठे थे। क्योंकि मुझे भी समय नहीं मिल पाता था और मेरे भाइयों को भी समय नहीं मिल पाता था। इस वजह से हम लोग साथ में नहीं बैठ पाते थे लेकिन काफी समय से हम लोगो ने एक साथ समय बिताया। हम लोगों ने उस दिन काफी इंजॉय किया। मेरे पिताजी भी हमें देखकर खुश हो गए। अब जब भी मेरी छुट्टी होती तो मैं अपने चाचा लोगों के घर चला जाता हूं और कभी वह हमारे घर आ जाया करते। मुझे बहुत ही अच्छा लगता है जब वह हमारे घर आते है और जब हम उनके घर जाते। एक दिन मेरे चाचा ने मुझे कहा कि बेटा तुम अपनी चाची को हॉस्पिटल लेकर चले जाना। मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं उन्हें हॉस्पिटल लेकर चला जाऊंगा। अब मैं उन्हें हॉस्पिटल लेकर चला गया। क्योंकि उनका स्वास्थ्य थोड़ा खराब था। डॉक्टर से मैंने उनका इलाज करवाया और डॉक्टर ने दवाई दी। उसके बाद मैं उन्हें  अपने घर ले आया। तब तक मेरे चाचा भी घर वापस लौट चुके थे और वह कहने लगे मैं तुम्हारा शुक्रिया कहना चाहता हूं। मैंने अपने चाचा को बोला इसमें कोई धन्यवाद कहने वाली बात नहीं है। आप लोग हमारे ही अपने हो। तो मुझे आपके काम करने में कोई परेशानी कैसे हो सकती है। यह सुनकर मेरे चाचा बहुत खुश हो गये और मेरी चाची भी बहुत खुश हो गई।

मैं अपने घर चला गया जब मेरी छुट्टी थी तो मैने सोचा चाचा के घर जाता हूं। जैसे ही मैं वहां पहुंचा तो घर पर सिर्फ पारुल थी। मैंने उससे पूछा चाचा-चाची कहां है। वह कहने लगी कि वह मम्मी को लेकर हॉस्पिटल गए हैं उनकी तबीयत दोबारा से खराब हो गई थी और मैं घर पर ही हूं। अब मैं वहां पर ही उनका इंतजार करने के लिए बैठ गया और मैं पारुल से भी बात कर रहा था। पारुल ने कहा कि मैं नहा कर आती हूं वह जैसे ही नहाने गई तो अपने बाथरूम से जब बाहर निकल रही थी तो उसका पैर भी फिसल गया। जैसे ही मैं वहां पहुंच तो मैंने देखा वह  एकदम नंगी है उसका तौलिया उसके हाथ से छूट गया था। अब मैंने उसे अपने हाथों से उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया। जब मैं उसे अपने हाथों से उठा रहा था तो उसक गांड मेरे हाथों पर लग रही थी और उसकी चूत में एक भी बाल नहीं था। मैंने जैसे ही उसे बिस्तर पर लेटाया तो मेरा हाथ उसके चूत पर चला गया और मैं ऐसे ही उसकी चूत को अपने हाथों से रगडने लगा। वह बहुत उत्तेजित हो गई और अपने मुंह से सिसकियां निकालने लगी। मैंने भी उसकी चूत को चाटना शुरु कर दिया उसकी चूत भी गीली हो चुकी थी। मैंने उसके दोनों पैरों को एकदम से चौड़ा करते हुए अपने लंड को अंदर घुसेड़ने शुरू कर दिया।

जैसे ही मैंने अंदर डाला तो उसकी झिल्ली टूट गई। उसने मुझे कसकर पकड़ लिया मैं उसे ऐसे ही तेजी से धक्के मारने लगा। वह मुझसे कहती भैया थोड़ा आराम से मुझे चोदो मेरा यह पहला अनुभव है। लेकिन मैं उसे ऐसे ही झटके मारता जाता और उसकी चूत से खून निकलता जा रहा था। मैंने उसके स्तनों को भी अपने हाथ में लेकर चूसने शुरू कर दिया। मैं जैसे ही उसके स्तनों को दबाता तो वह और ज्यादा मस्त हो जाती। मैं ऐसे ही उसे अब बड़ी तेजी से झटके मारने लगा और मैंने उसके पैरों को चिपका दिया। जिससे उसकी चूत बहुत ज्यादा टाइट हो गई। अब मैं ऐसे ही उसे धक्के मारने लगा लेकिन उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसका झड़ गया। अब वह अपने आप को मेरे सामने समर्पित कर चुकी थी। वह अपने पैर खोलकर ऐसे ही लेटी रही लेकिन मेरा अभी झडा नहीं था। मैं उसे बड़ी तेज गति से चोद रहा था और उसका शरीर गर्म हो चुका था। मेरा लंड उसकी चूत कि गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर सका और मेरा भी माल गिर गया। जैसे ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो उसकी योनि के अंदर ही मेरा सारा वीर्य गिर चुका था। हम दोनों ने  अपने कपड़े पहने और चादर को चेंज किया। उसके थोड़ी देर बाद चाचा और चाची वापस आ गए। उसके बाद से तो पारुल कि मैंने बहुत बार चूत मारी।


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