छोटी सी भूल भाग – २

वो अपने लिंग को हाथ में पकड़ कर हिला रहा था। उसने “पूछा कैसा लगा मेरा लोड़ा?”
मैं कुछ नहीं बोली, और शर्म से अपनी नजरें झुका ली।
वो बोला, ” तुझे पता है तेरी फिगर कितनी मस्त है, मैं अक्सर तुझे शाम को मार्केट में तेरे पति के साथ देखा है।
मैं हैरानी से सब सुन रही थी।
उसने आगे कहा, तू जब चलती है तो तेरी गांड क्या छलकती है, सच तुझे मटक-मटक कर चलते देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता है और मन करता है कि तेरी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर, लंड घुसा दूं और तेरी खूब गांड मारूं?
मैं शरम से पानी पानी हो गयी, पहली बार किसी ने मेरे बारे में ऐसी गंदी बात कही थी। मैं आखिर क्यों ये बकवास सुन रही थी पता नहीं, पर मेरे शरीर में एक अजीब सी हलचल हो रही थी ये सब सुन और देखकर।
वो आगे बोला तेरी चूचियाँ तो इस शहर में सबसे बड़ी है, शायद ही किसी की इतनी रसीली चूचियाँ होंगी, प्लीज एक बार दिखा ना।
मैने उसे गर्दन हिला कर साफ मना कर दिया, कि मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी।
थोड़ा मायूस सा होकर वो बोला, एक बात बता, तेरे पति का भी इतना बड़ा है क्या?
और मेरी गर्दन अपने आप ना के इशारे में हिल गई। तभी मुझे कुछ जलने की बदबू आई, मुझे खयाल आया कि ओह! मेरी सब्जी जल गई!!!
और मैं जल्दी से गैस की तरफ भागी, पर नुकसान हो चुका था। मैं गैस बंद कर के वापस खिड़की पर आ गई।
वो बोला क्या हुआ?
मुझे जाने क्या सूझा मैने कहा, तुम यहाँ से चले जाओ और दुबारा यहाँ मत आना। यह कर मुझे अजीब सा सूकून मिला। मुझे अहसास हो रहा थ कि जो कुछ भी हो रहा है, गलत है।
मैं फिर अपने काम में लग गयी, क्यों कि ३ बजने वाले थे, और संजय किसी भी वक्*त आ सकते थे, मैने अपना पूरा ध्यान खाना बनाने में लगा दिया। मैने कोई १० मिनिट बाद खिड़की से बाहर देखा तो वहाँ कोई नहीं था। मैने मन ही मन चैन की साँस ली। पर उस लड़के का कहा एक एक बोल मेरे कानों में गूंज रहा था। मैने सोचा कि क्या मैं सच में इतनी सेक्सी हूं कि लड़का मुझ पर फिदा हो गया है?
उस दिन संजय के जाने के बाद, मैने खुद को शीशे में गौर से देखा। मैने अपनी फिगर पर नजर दौड़ायी। मैने घूम कर अपने नितम्बों को भी देखा और पाया कि मैं वाकई में सुन्दर हूँ। पहली बार मैने खुद को ऐसे नजरिये से देखा था। पर अचानक मेरा अपने परिवार पर ध्यान गया और मुझे होश आया, कि मैं ये क्या कर रही हूँ और मैने अपने कपड़े पहने और सो गई।
अगले दिन मैने फैसला किया कि मैं खिडकी से बाहर नहीं झाकूंगी। पर मन में बार-बार उस लड़के का खयाल आ रहे थे। उसका कहा एक एक बोल मेरे मन में मानों बस गया था।
उसका लिंग मानों एक मूवी की तरह मेरे दिमाग में घूम रहा था। मैं कब २ बजने का इंतजार करने लगी पता ही नहीं चला।
मैने ठीक २ बजे बाहर देखा पर बाहर कोई नहीं था। मैं बार-बार आ कर देखती रही पर कोई नहीं दिखा। ३ बज गये और मेरे पति घर आ गये। मैं खाना परोसने लगी। संजय ने खाना खाया और करीब ३:३० बजे वापस चले गये।
मैं बर्तन रखने रसोई में आई तो देखा कि वह बाहर खड़ा था। मैं झट से खिड़की पर आ गई। वो भी जल्दी से खिड़की के पास आ गया।
उसने कहा, आज मेरी साईकिल पंक्चर हो गई थी, इसलिए २ बजे नहीं आ पाया। मैने कुछ नहीं कहा पर मेरे शरीर में उसे देखकर अजीब सी हलचल हो रही थी।
वो बोला, पता है कल मैने एक लड़की की चूत मारी, बहुत मजा आया, पर उसकी मारते हुए मुझे तेरा ही खयाल आ रहा था, माँ कसम, क्या बॉडी है तेरी, मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं तेरी ही चूत मार रहा हूँ।
मैने शरम से अपनी नजरें झुका ली। मैने सोचा आखिर ये लड़का ऐसी गंदी बातें क्यों करता है पर ये सच था कि ये सब सुन सुन कर मेरी योनी गीली हो गई थी। पहली बार मैने ऐसी बातें सुनी थी।
उसने पूछा, तेरा नाम क्या है?
ना जाने क्यों मैने कहा, रितु! रितु गुप्*ता।
मैने पूछा, तुम्हारा नाम क्या है?
उसने जवाब दिया, “बिल्लू” और गिड़गिड़ाते हुए बोला, प्लीज एक बार अपनी चूची दिखा दो ना, मैं भी तो तुम्हे अपना लंड दिखाता हूँ
पर मुझ में इतनी हिम्मत नहीं थी कि संजय के अलावा, किसी और को अपने प्राईवेट पार्ट्स दिखा सकूं और मैं खामोश खड़ी रही।
वो समझ गया कि मैं उसे अपने उभार नहीं दिखाऊंगी.
वो बोला ठीक है, मैं लेट हो रहा हूं, मुझे काम पर जाना है।
मैने पुछा काम पर, क्या तुम पढ़ते नहीं हो ?.
उसने कहा, नहीं मैं इलेक्ट्रिक की दुकान पर इलेक्ट्रीशियन हूं, कभी तुम्हारे यहाँ बिजली की समस्या हो तो बताना।
ये कह कर वो चला गया और मैं भी अपने बेडरूम में आकर लेट गई।
शाम को संजय के आने के बाद मैं ब्यूटी पार्लर चली गई। वहाँ थोड़ा टाइम लग गया और ८ बज गये। मैं बाहर आकर रिक्शे का इंतजार करने लगी। अचानक एक रिक्शा मेरे सामने आकर रुका। पर मैं रिक्शा वाले को देखकर सहम गई।
वो बिल्लू था। मैने पूछा, तुमने झूठ कहा था कि तुम इलेक्ट्रिशियन हो।
वो बोला, नहीं वो सच था, मेरा वो काम थोड़ा मंदा है इसलिए कभी-कभी ये किराये का रिक्शा भी चला लेता हूँ।
मैने कुछ नहीं कहा और हैरानी से वहाँ खड़ी रही।
वो बोला, चलो बैठ जाओ मैं तुम्हें घर पर उतार दूंगा।
मैं उसे अचानक देख कर सहम गयी थी इसलिये समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूं।
फिर मैने सोचा घर तो जाना ही है, मैं लेट भी हो रही थी, और मैं डरते डरते उसके रिक्शे मैं बैठ ही गई।
मैं रिक्शे में बैठ गयी और उसने रिक्शा चला दिया।
थोड़ी देर चलने के बाद वो बोला, मैने तुझे शाम को ब्यूटी पार्लर में जाते हुए देख लिया था
मैने पूछा, तुम क्या, मेरा हर वक्*त पीछा करते हो?
उसने जवाब दिया, अरे नहीं! मैं यहीं रिक्शा स्टैण्ड पर खड़ा था, शायद तुमने ध्यान नहीं दिया।
मैने कहा, ठीक है, रिक्शा जरा तेज चलाओ, मैं लेट हो रही हूँ।
वो बोला, आज मौसम कितना मस्त है ना?
मैने पूछा क्यों?
वो बोला, अरे ऊपर देखो बादल छाये हुए हैं। तुझे भी ऐसा मौसम अच्छा लगता होगा ना?
मैं समझ गयी किये क्या सुनना चाहता है और मैं चुप रही और कुछ नहीं बोली।
थोड़ी देर बाद मैने कहा, मुझे घर जल्दी जाना है, प्लीज थोड़ा तेज-तेज चलाओ।
उसने जैसे कुछ नहीं सुना, और बोला, मेरा तो मन ऐसे मौसम में तेरी जैसी मस्त आईटम की चूत मारने का करता है।
मैं ये सुन कर दंग रह गई और कुछ नहीं बोली। मुझे ऐसा लग रहा था कि उसके रिक्शे में बैठ कर मैने जिंदगी की सबसे बड़ी भूल कर ली है।
उसने मुझे पीछे मुड़ कर देखा और मुझे आँख मारते हुए बोला, क्या करूँ तू चीज ही ऐसी है।
मैने बिना कुछ कहे अपनी नजरें झुका ली, और मैं कर भी क्या सकती थी।
मैने उसे फिर याद दिलाया, बिल्लू, रिक्शा तेज चलाओ मुझे जल्दी घर जाना है।
पर वो धीरे- धीरे रिक्शा चलाता रहा, मानों उसने कुछ सुना ही ना हो।
वो बोला, एक शर्त लगाती हो?
मैने ना जाने क्यों धीरे से पूछा, क्या?
वो बोला आज की रात, तेरा पति, तेरी जरूर लेगा, ऐसे मौसम में कौन तेरी चूत नहीं मारेगा।
मैं कुछ भी बोलने की हालत में नहीं थी, मुझे लग रहा था कि ये लड़का कुछ ज्यादा ही बोल रहा है और सारी सीमायें लांघ रहा है। पर मैं कर भी क्या सकती थी, कहीं ना कहीं मेरी वजह से ही उसकी इतनी हिम्मत बढ़ी थी। मुझे शायद रसोई की खिड़की बन्द कर देनी चाहिये थी।
वो फिर पीछे मुड़ कर बोला, है, मुझ पर तरस खा, आज मुझे भी दे, दे, देख ना इस मौसम में तेरे कारण मेरा लंड खड़ा हो गया है।
मैं कुछ नहीं बोली और चुपचाप उसकी बकवास सुनती रही। पर मेरे शरीर के रोम-रोम में एक अजीब सी हलचल हो रही थी।
वो फिर पीछे मुड़ा और बोला, बता चलती है क्या, मेरे साथ? मेरे घर में कोई नहीं है।
मैने इस बार उसे साफ-साफ बोल दिया कि मुझे जल्दी घर जाना है, तुम रिक्शा तेज क्यों नहीं चलाते।
ये सुनते ही उसने रिक्शे की स्पीड बढ़ा दी। थोड़ी देर वो चुप रहा। मैं भी खामोश रही।
अचानक वह फिर से पीछे मुड़ा और मुझे घूर कर देखा, और धीरे से बोला, लगता है मेरी सारी मेहनत बेकार गई। मैने वो सुन लिया, पर कोई प्रतिक्रिया नहीं की। मैं मन ही मन सोच रही थी कि, बेचारी की, क्या हालत हो रही है। पर इसमें मेरी तो कोई गलती नहीं थी। यही तो मेरे पीछे हाथ धो कर पड़ा था। मैने तो इसे अपनी खिड़की पर नहीं आने को नहीं कहा था। उसने बड़े-बड़े ख्वाब देखने से पहले, एक बार सोचना चाहिये था।मैं किसी भी हालत में अपनी सीमायें नहीं लांघ सकती थी। आखिर मेरा एक हंसता- खेलता परिवार था। मैं ये सब सोच रही थी कि, रिक्शा अचानक रुक गया। मैने पूछा क्या हुआ? वो बोला रिक्शे की चैन उतर गई है। और वो चैन चढ़ाने के लिये रिक्शे से नीचे उतरा और रिक्शे के पीछे आ गया। चैन चढ़ा कर वो बोला, मैं थोड़ा पेशाब कर लेता हूँ और सामने झाड़ियों में चला गया।
मैं चुपचाप बैठी रही। मैं सोच रही थी कि, बड़ा ही शरारती लड़का है ये, पता नहीं अब क्या करने वाला है। मैने सामने की झाड़ियों में देखा तो दंग रह गई। उसने अपना लिंग बाहर निकाल रखा था और मेरी तरफ हिला रहा था। मैने फौरन नजरें फेर ली। कोई भी ये नजारा देख सकता था। मुझे उस पर गुस्सा आ गया।
वो थोड़ी देर बाद आया और बोला, कैसा लगा उन झाड़ियों में मेरे लंड का नजारा? मैने उसे डाँटते हुए कहा, तुम पागल हो गये हो क्या? कोई देख लेता तो? कम से कम, अपनी नहीं नहीं तो मेरी इज्जत की तो परवाह करो।
वो थोड़ा सकपका गया और बोला, ओह!सोरी, मुझे माफ कर दो। मुझे इस बात का बिल्कुल भी ध्या्न नहीं रहा। वो रिक्शे पर चढा और रिक्शा चलाने लगा।
कुछ देर तक वो चुपचाप रिक्शा चलाता रहा। फिर अचानक पीछे मुड़ा और बोला, सबसे ज्यादा तुम्हारी गलती है। मैने गुस्से में पूछा वो कैसे? वो बोला तुम इतनी सुन्दर जो हो। और ऊपर से ये मौसम। मेरी तो बस जान जाने को है। प्लीज एक बार दे दो ना। मेरे मुँह से अचानक निकल गया क्या? और मैं मन ही मन में बहुत पछताई कि ये मैने क्या पूछ लिया।
मैं तो जानती ही थी कि, इसे क्या चाहिये। वो झट से पीछे मुड़ा और मैने अपनी नजरें झुका ली। मैं समझ गई थी कि, मैने इसे गन्दी बातें करने का मौका दे दिया है। वो बोला हाय- हाय क्या शरमाती है तू! सुनोगी नहीं कि एक बा क्या दे दो। मैने शरम से ना में गर्दन हिला दी। वो बोला, हाय रे तेरी इसी अदा पे तो मैं मर मिटा हूँ, सच में तेरी चूत लेने का मजा ही कुछ और होगा। मैं कसम खाता हूं, मैं किसी और की नहीं मारूंगा, बस एक बार तू मुझे अपनी दे, दे।मैं शर्म से लाल हो गई, ये सोच कर कि मैं ये सब क्या सुन रही थी। अचानक मेरा श्यान रिक्शे के पीछे गया, और मैने देखा कि, एक साईकिल वाला हमारे रिक्शे के बिल्कुल पीछे है। उसने शायद सब सुन लिया था। जैसे ही मैं पीछे मुड़ी मेरी उस से नजरें तकराई, और उसने मुझे आँख मार दी। मैने फौरन गर्दन मोड़ ली।
वो बहुत ही बदसूरत सा, काले रंग का, कोई ३४-३५ साल का आदमी था। मैं घबरा गई कि अब क्या होगा। वो रिक्शे के बिल्कुल साथ-साथ चलने लगा और मूझे घूरने लगा।
मैने उसकी तरफ बिल्कुल नहीं देखा और नजरें झुका कर बैठी रही। वो बोला, अरे वाह भाई, क्या माल पटाया है छोकरे तूने। मैं चुपचाप सुनती रही। वह मेरी तरफ देखते हुए बोला, मुझे भी दे, दे ना। मैने उसकी बाट पर ध्यान नहीं दिया, पर वो फिर बोला, आजा इसी सड़क पर मेरा घर है, मेरे साथ चल तुझे खुश कर दूंगा, तेरी अच्छे से लूंगा। मैने गुस्से में उसकी तरफ देखा तो, मुझे अपनी नजरें झुकानी पड़ी।
वह सरे आम, मेरी तरफ देख कर, साईकिल चलाते हुए, एक हाथ से अपना लिंग मसल रहा था। मैं सोच रही थी कि देखो कैसी हालत हो गई है मेरी, ऐसे बदसूरत आदमी से मुझे ऐसी गन्दी-गन्दी बातें सुननी पड़ रही है। पर मैं कर भी क्या सकती थी।
बिल्लू ने गुस्से मेंम उस एबोला, अबे, चल अपना रास्ता पकड़। वो बोला क्यों साले, ये तेरी बीवी है क्या? और बिल्लू फौरन बोला “हाँ मेरी बीवी है, चल निकल यहाँ से”। मैं चुपचाप सब सुनती रही। मैं बिल्लू की बहादुरी पर कुश थी। पर उसने मुझे अपनी बीवी क्यों कहा? मुझे ये सब अच्छा नहीं लग रहा था।
वो आदमी वहाँ से नहीं हटा, और रिक्शे के साथ-साथ चलता रहा। कितना घुनौना चेहरा था उसका। उसे देख कर ही उल्टी आने को हो रही थी, और ऐसा आदमी मेरे बारे में ऐसी गंदी बातें कर रहा था, सब कुछ बरदाश्त के बाहर था। उस आदमी जी हिम्मत बढ़ती जा रही थी। वो मेरी तरफ गन्दे गन्दे इशारे करने लगा।
बिल्लू ने रिक्शा रोक लिया, और आदमी को बोला ” अबे क्या है, यहाँ से जाता है कि नहीं? तभी सड़क पर दो चार और वाहन आते दिखे और वो आदमी समझ गया कि अब यहाँ रुकना ठीक नहीं और सीधा आगे बढ़ गया। पर जाते हुए, उसने पीछे मुड़ कर मुझे देखा और मैने अपनी गर्दन घुमा ली। मैं उसके घिनौन्ने चेहरे को नहीं देखना चाहती थी।


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