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गांड मारने का आंनद

Gaand marne ka anand:

hindi sex story, antarvasna मैं बचपन से पढ़ने में एक सामान्य छात्र था जिस वजह से मैं घर पर हमेशा अपने पिताजी की डांट खाता था, मेरी बहन पढ़ने में बचपन से ही अच्छी थी और मेरे बड़े भैया भी पढ़ने में बहुत अच्छे थे। घर में छोटा होने की वजह से शायद मुझे उन लोगों ने कभी समझा ही नहीं मैं जब अपने स्कूल के आखिरी दिनों में था तो उस वक्त मेरे पिताजी मुझे पढ़ाई के लिए बहुत डांटा करते थे और हमेशा मेरे भैया और दीदी का उदाहरण मुझे देते थे वह मुझे कहते कि तुम हर बार मेरी नाक कटवा देते हो तुम पढ़ने में बिल्कुल अच्छे नहीं हो तुम्हारे भैया और दीदी पढ़ने में कितने अच्छे हैं उन लोगों की वजह से मेरा हमेशा सर ऊंचा रहता है लेकिन तुम तो जैसे मेरी बेइज्जती करवाने पर तुले रहते हो।

उनकी वजह से मुझे भी उनसे डर लगने लगा था इसलिए मैं ना तो उनसे कभी किसी चीज के लिए कहता और ना ही मैं उनसे ज्यादा बात किया करता था क्योंकि मुझे हमेशा पता होता कि वह मुझे डांट देंगे इसलिए मैं उनसे कभी भी बात नहीं किया करता शायद इसी वजह से मेरे और मेरे पिताजी के बीच हमेशा दूरियां बनती चली गई। मैं जब कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था तो उस वक्त मेरी दोस्ती कॉलेज के सबसे शैतान लड़कों से हुई उनका कॉलेज में पहले से ही नाम बदनाम था और वह लोग आए दिन हमेशा कॉलेज में झगड़ा किया करते, मुझे भी उनके साथ रहते हुए उनके ही जैसी आदत लग गई थी और मैं भी उन्हीं की तरह बनने लगा इस वजह से मेरे घर पर भी कई बार शिकायत चली जाती लेकिन हमेशा मेरी बहन मुझे बचा लिया करती, मेरी बहन और मेरे बीच में बहुत बात होती थी वह मुझे अच्छे से समझती थी इसलिए मैं उसे अपने क्लास में जो भी होता था वह सब उसे बाताया करता। कॉलेज के दिन भी अब पूरे हो चुके थे और मेरी कमाई का दौर शुरू हो गया था मैं एक कंपनी में काम करने लगा।

मेरे पिताजी तो मुझसे कभी खुश नहीं थे इसलिए वह मुझसे ना तो कभी कुछ बात किया करते और ना ही मुझे कभी किसी चीज के लिए कहते, मेरे भैया पढ़ाई में अच्छे होने की वजह से उनका सिलेक्शन एक बहुत ही बड़ी कंपनी में हो गया और मुझे भी उस बात के लिए बहुत खुशी हुई कि उनका सिलेक्शन एक अच्छी कंपनी में हो गया है उस दिन हमारे घर पर मेरे पिताजी ने अपने दोस्तों और हमारे रिश्तेदारों को भी बुलवा लिया सब कुछ इतनी जल्दी बाजी में हुआ कि हमें कुछ भी करने का मौका नहीं मिला लेकिन मेरे पिताजी ने सब कुछ बहुत ही अच्छे से मैनेज किया हुआ था सब लोग बड़े ही खुश थे और अपने भैया की खुशी में मैं भी बहुत खुश था। मेरे मामा मुझसे बात कर रहे थे और वह कहने लगे कि तुम भी अपने भैया की तरह किसी अच्छी कंपनी में ज्वाइन कर लो, जब मेरे मामा मुझसे बात कर रहे थे तभी मेरे पिताजी भी उनके पीछे से आ गये और उन्होंने यह बात सुन ली उन्होंने उस वक्त मेरे मामा जी से कहा कि यह नालायक कभी भी हमारा सर ऊंचा नहीं करेगा इसकी वजह से तो मुझे हमेशा ही अपने सर को नीचा करना पड़ा है। मुझे यह बात उस वक्त बहुत बुरी लगी और मैं वहां से गुस्से में अपनी छत पर चला गया मैं इतना ज्यादा गुस्से में था कि मेरी किसी से भी बात करने की इच्छा नहीं हो रही थी उस वक्त मेरे मामा जी मेरे पीछे आए और वह कहने लगे कि बेटा तुम्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है तुम अपने पिताजी की बात को अपने दिल पर ना लिया करो वह तुमसे बड़े हैं और हो सकता है कि उन्हें तुम्हारे भैया और तुम्हारी बहन पर ज्यादा भरोसा हो लेकिन ऐसा नहीं है कि वह तुमसे प्यार नहीं करते, मैंने अपने मामा जी से कहा मामा जी मैं बचपन से ही यह सब देखता आ रहा हूं उन्होंने कभी भी मुझे अपना नहीं माना वह बचपन से ही मेरी गलतियों को कुछ ज्यादा ही बढ़ा चढ़ाकर लोगों के सामने पेश करते हैं और मुझे तो बचपन से उनकी इतनी डांट मिली है कि मैंने कभी भी उनसे बात करने की सोची ही नहीं और ना ही मैं अब उनसे बात करना चाहता हूं।

उस दिन मुझे अपने पिताजी की बातों का बहुत ही ज्यादा बुरा लगा मुझे हमेशा लगता था कि कभी वह मुझे समझेंगे लेकिन वह ना तो मुझे कभी समझने वाले थे और ना ही वह कभी मेरा अच्छा चाहते थे, मैंने यह बात अपने दिल में बैठा ली थी कि मुझे अब किसी और जगह चले जाना चाहिए क्योंकि मुझे मेरे पिता जी बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे इसलिए मैंने अपना मन किसी और जगह जाने का बना लिया था हालांकि मेरी मां को यह बात बहुत ही ज्यादा बुरी लगी और वह कहने लगी कि बेटा तुम घर छोड़ कर कहां जाओगे? मैंने मम्मी से कहा मम्मी मैं घर छोड़कर नहीं जा रहा हूं मैं तो सिर्फ दूसरे शहर नौकरी करने के लिए जा रहा हूं हालांकि उस वक्त मेरी नौकरी नहीं लगी थी लेकिन मैं ज्यादा समय तक घर पर नहीं रुकना चाहता था और मुझे किसी अलग जगह जाना था ताकि मैं अपने आप को साबित कर संकू। मैंने बेंगलुरु जाने की सोची, मेरी सैलरी से ही कुछ पैसे मैंने सेविंग कर लिए थे और उन्ही पैसे से मैं बेंगलुरु चला गया मैं जब बेंगलुरु गया तो वहां पर मैं ज्यादा किसी को नहीं पहचानता था और मुझे ना ही किसी के पास जाना ज्यादा अच्छा लगता है इसलिए मैंने अपने रहने की व्यवस्था खुद ही कि, मैं जिस जगह रहता था वहां पर और भी लोग रहते थे।

मुझे वहां रहते हुए थोड़ा समय हो चुका था इसलिए मेरी लोगो से अच्छी बातचीत होने लगी थी और उसी दौरान मेरी मुलाकात एक बड़े ही इंटरेस्टिंग पर्सन से हुई उसका नाम सोनू है सोनू और मेरी दोस्ती इतनी अच्छी हो गई कि हम दोनों अब एक दूसरे के साथ ही ज्यादा समय बिताने लगे थे, मुझे सोनू के बारे में इतना पता था कि वह दिल्ली का रहने वाला है और उसके परिवार में उसके माता पिता और उसके दो छोटे भाई हैं, सोनू ने मुझे बताया कि उसके कंधों पर ही घर की सारी जिम्मेदारी है इसलिए वह बेंगलूरु आ गया, सोनू की वजह से ही मैं बेंगलुरु के बारे में जान पाया उसे बेंगलुरु में रहते हुए 6 वर्ष हो चुके हैं और वह इन 6 वर्षों में लगभग सब लोगों को वहां पर पहचानता है। मैंने सोनू से कहा तुम तो बड़े ही अच्छे से सब लोगों को पहचानते हो, सोनू कहने लगा बस यार अमित पूछो मत इन 6 सालों में ना जाने अपने जीवन में मैंने क्या-क्या देखा लेकिन मैंने यहां पर रहते हुए पैसे बहुत ही अच्छे कमाए और मैंने बहुत मेहनत भी की। मैंने सोनू को भी अपने बारे में सब कुछ बता दिया था सोनू कहने लगा देखो दोस्त मेरे साथ रहोगे तो तुम्हें कभी भी कोई तकलीफ नहीं होगी और यदि हम दोनों मिलकर काम करेंगे तो जरूर हम दोनों को फायदा होगा। मैंने सोनू को कहा कि मुझे अपना ही कोई काम शुरू करना है, वह कहने लगा तुम पैसे की चिंता बिल्कुल भी मत करना तुम्हें जितना भी पैसा चाहिए होगा वह मैं तुम्हें दिलवा दूंगा, मैंने सोनू से कहा लेकिन तुम मुझे पैसे कैसे दिलवाओगे, वह कहने लगा बस तुम यह सब मेरे ऊपर छोड़ दो तुम्हें इस बात की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है यह सब मैं मैनेज कर लूंगा तुम सिर्फ मेरा पूरा साथ देना। मैंने सोनू से कहा चलो अब तुम पर ही भरोसा कर लेता हूं सोनू कहने लगा कि तुम अपने ऊपर भी पूरा भरोसा रखो सब कुछ ठीक होगा। सोनू मुझे हमेशा ही किसी ना किसी व्यक्ति से मिलाता एक दिन उसने मुझे अपनी एक दोस्त से मिलवाया उसका नाम मोना था। मोना से मैं पहली बार मिला था लेकिन जब मैं उसे मिला तो मैं उसके बदन में खो सा हट गया उसके बदन का कोई भी ऐसा हिस्सा नहीं था जो कि बिल्कुल सही शेप में नहीं था।

उसके स्तन बाहर की तरफ उभरे थे उसकी गांड भी बाहर की तरफ को निकली हुई थी। मुझे उसे देख कर बहुत अच्छा लग रहा था मैं उसे बड़े ध्यान से देख रहा था तभी सोनू ने मेरे हाथ को दबाया और मेरे कान में कहने लगा तुम एक काम करो आज रात मोना के साथ ही रुक जाओ। मैंने सोनू से कहा लेकिन यह संभव नहीं है वह कहने लगा तुम चिंता ना करो मैं मोना से इस बारे में बात करता हूं। उसने मोना से कहा आज रात अमित तुम्हारे साथ ही रुकेगा। मैंने कभी सोचा नहीं था मैं मोना के साथ रहूंगा लेकिन जब मैं उस दिन मोना के साथ रूका तो वह बड़े अच्छे अंदाज में मेरे साथ बैठी हुई थी। मैं उससे बात कर रहा था हम दोनों को बातें करते हुए काफी समय हो चुका था मैं सिर्फ मोना के चेहरे पर ही देख रहा था। मैं जब उसके चेहरे पर देख रहा था तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहने लगी अमित यार मेरे जीवन में तो बहुत अकेलापन है।

मैंने भी उससे अपने दिल की सारी बात बताई हम दोनों एक दूसरे की बातों में खो गए थे मैंने जब उसके होठों को किस किया तो वह भी मेरे होठों को चूमने लगी। हम दोनों के बीच में लगातार गर्मी बढ़ने लगी थी मैंने मोना को नंगा किया और उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो उसके मुंह से चीखने की आवाज निकल पड़ी। मैंने उसके साथ काफी देर तक संभोग किया लेकिन मुझे उस वक्त मजा आया जब मैंने उसकी गांड मारनी शुरू की मुझे अच्छा लगा। मैं उसके साथ काफी देर तक मजकरता रहा मैंने उसकी गांड से खून निकाल कर रख दिया था। मुझे बहुत मजा आ रहा था हम दोनों के शरीर पूरी तरीके से गर्म हो चुके थे लेकिन जैसे जैसे मैं उसे धक्का मारता रहा वैसे वैसे मेरे लंड से खून भी निकलता रहा। हम दोनों ने रात भर मजा किया उसके बाद मोना ने मुझे काम शुरू करने के लिए पैसे दिए मैंने उन पैसों से बहुत ही अच्छा काम किया। अब मैं बेंगलुरु में ही सेटल हो चुका हूं मेरे पास पैसे की कोई कमी नहीं है मेरे पिता जी को जब इस बात का पता चला तो वह बड़े ही खुश हुए।


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