घुंघट उठाकर चूत ली

Ghunghat uthakar chut li:

Antarvasna, hindi sex stories मेरा घर जयपुर में है और मैं बचपन से ही जयपुर में रहा हूं मैंने आज तक कभी भी गांव नहीं देखा मैं जिस ऑफिस में काम करता हूं उस ऑफिस में मेरे साथ प्रशांत भी काम करता है। प्रशांत बहुत ही अच्छा लड़का है और वह मेरा अच्छा दोस्त भी है एक बार उसने मुझे अपने गांव चलने के लिए कहा मैं प्रशांत के साथ उसके गांव चले गया उसका गांव जैसलमेर के पास है जब मैं उसके घर जाता गया तो मुझे उसके गांव में बड़ा अच्छा लगा और वहां पर हम लोग एक हफ्ते तक रुके। उस एक हफ्ते के दौरान उसकी बहन की भी शादी हो गई और हम लोग वापस जयपुर चले आये शादी के दौरान मैं सुरभि से मिला था सुरभि प्रशांत की कोई रिश्तेदार है लेकिन मुझे नहीं पता था कि उसका सुरभि के साथ क्या रिश्ता है।

मेरी सुरभि से उसी वक्त बात हुई थी और हम दोनों उसके बाद तो मिल नहीं सके लेकिन हमारी फोन पर बात होती रही मैंने यह बात प्रशांत को नहीं बताई थी लेकिन एक दिन मैंने सोचा मैं इस बारे में परेशान से बात करूं। मैंने जब प्रशांत को सुरभि के बारे में बताया तो वह कहने लगा सुरभि से मेरी भी ज्यादा मुलाकात नहीं है लेकिन मेरे घर में सब लोग सुरभि के बारे में बहुत अच्छा कहते हैं और वह बहुत अच्छी लड़की है। सुरभि जैसलमेर में रहती है और मैंने प्रशांत को अपने और सुरभि के बारे में बता दिया था प्रशांत ने मुझे कहा यदि तुम्हें मेरी कोई जरूरत हो तो तुम मुझे बताना क्योंकि प्रशांत चाहता था कि मैं सुरभि से बात करूं। प्रशांत को मेरे बारे में सब कुछ पता है और वह मेरे बारे में अच्छे से जानता है की मैं किस नेचर का हूं मेरी बहुत ही सीमित दायरे में दोस्ती है मेरे दोस्त इतने ज्यादा नहीं है लेकिन प्रशांत के साथ मेरा काफी अच्छा दोस्ताना रिश्ता है। मैंने प्रशांत को सुरभि के बारे में बता दिया था लेकिन सुरभि से मिलने का समय मेरे पास नहीं था सुरभि भी जैसलमेर में अपना ब्यूटी पार्लर चलाती है इसलिए वह भी मुझसे मिलने नहीं आ सकती थी लेकिन हम दोनों ने मिलने का फैसला किया परंतु हम दोनों का मिलना हो ही नहीं पाया।

जब भी हम दोनों एक दूसरे के मिलने के बारे में सोचते तो जरूर कोई ना कोई रूकावट आ जाती लेकिन मैं सुरभि से मिलना ही चाहता था और मैंने उससे मिलने के बारे में सोचा। एक दिन मैं जैसलमेर चला गया मैं जब जैसलमेर गया तो मैं दो दिन के लिए ही जैसलमेर गया था मैं जब सुरभि से मिला तो सुरभि से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा यह मेरी दूसरी ही मुलाकात थी लेकिन सुरभि से मिलना मेरे लिए बहुत अच्छा रहा। सुरभि ने मुझे पूरा वक्त दिया मैंने कभी सोचा नहीं था कि सुरभि से मेरा रिलेशन इतना बढ़ जाएगा कि मैं उसके लिए इतना बेचैन हो जाऊंगा और मैं दो दिन तक जैसलमेर मे रहा, दो दिन जैसलमेर में रहना मेरे लिए बड़ा ही अच्छा था और मैंने सुरभि के साथ पूरा समय बिताया। वह भी मेरे साथ समय बिता कर खुश थी अब मैं वापस आ चुका था मैंने इस बारे में प्रशांत को बता दिया था प्रशांत ने कहा तुम्हारी मुलाकात अच्छी रही प्रशांत को मैंने बताया हां सुरभि के साथ मेरी मुलाकात बड़ी अच्छी रही हम लोगों ने काफी अच्छा समय बिताया। प्रशांत ने मुझसे कहा मैं उसके पापा से तुम्हारे बारे में बात करता हूं मैंने प्रशांत से कहा अभी रहने दो मुझे थोड़ा और समय चाहिए मैं नहीं चाहता कि इतनी जल्दी मैं शादी का फैसला करूं अभी हम दोनों शादी के बारे में नहीं सोच रहे हैं। सब कुछ अच्छे से चल रहा था मेरे और सुरभि के बीच फोन पर ही बात हुआ करती थी लेकिन इस बारे में प्रशांत ने सुरभि के पापा से बात कर ली उसके पापा मुझसे मिलना चाहते थे उसके पापा की जैसलमेर में दुकान है और वह मुझसे मिलना चाहते थे। मैं उनसे मिलने के लिए तैयार हो गया जब हम लोग जयपुर में उनसे मिले तो उन्होंने मुझसे मेरे बारे में पूछा मैंने उन्हें सब कुछ बताया उसके पापा बहुत खुले विचारों के हैं मुझे नहीं मालूम था कि उसके पिताजी इतने अच्छे होंगे उन्होंने मेरे साथ सुरभि का रिश्ता करवाने की बात कही। सब कुछ अच्छे से चल रहा था लेकिन  मेरे पापा को मेरे और सुरभि के बीच का रिश्ता पसंद नहीं था और वह बिल्कुल भी नहीं चाहते थे कि हम दोनों की शादी हो मेरे पापा चाहते थे कि उनके दोस्त की बेटी मेघा से मेरी शादी हो लेकिन मैं बिल्कुल भी इस पक्ष में नहीं था।

मैंने पापा को समझाने की कोशिश की परंतु वह नहीं समझे फिर मैंने अपनी मम्मी से बात की और उन्हें कहा यदि पापा सुरभि के साथ मेरी शादी नहीं कर पाएंगे तो मैं उससे कोर्ट में शादी कर लूंगा। मेरी मम्मी कहने लगी बेटा तुम यह सब मत करना घर में तुम बड़े हो और हमने भी कुछ सपने देखे हैं हम चाहते हैं तुम्हारी शादी हम धूमधाम से करें। मेरे पापा भी अब इस रिश्ते को मान चुके थे लेकिन उन्हें मनाने में मुझे काफी समय लगा मेरी और सुरभि के बीच फोन पर अक्सर बातें होती रहती थी हम दोनों की सगाई होने वाली थी और जिस दिन हम दोनों की सगाई हुई उस दिन हम दोनों बहुत खुश थे। प्रशांत मुझे कहने लगा चलो अब तुम भी हमारे रिश्तेदार बनने वाले हो और तुमसे भी हमारा रिश्ता जुड़ने वाला है मैंने प्रशांत से कहा हां दोस्त अब हमारी दोस्ती और भी गहरी हो जाएगी। सुरभी और मेरी सगाई बड़े अच्छे से हुई हम दोनों अब भी अपने काम में बिजी रहते थे और जब हमारी शादी का समय नजदीक आने लगा तो सुरभि मुझसे पूछने लगी क्या तुम मुझसे शादी करने के लिए तैयार हो मैंने सुरभि से कहा मैं तुम्हें दिलो जान से चाहता हूं और तुमसे ही शादी करना चाहता हूं परन्तु यह सवाल तुम क्यों पूछ रही हो।

सुरभि ने मुझसे पूछा क्या शादी के बाद भी तुम मेरा ध्यान रखोगे और जिस प्रकार से हम लोग अभी प्यार करते हैं वैसे ही प्यार हम लोग शादी के बाद भी करेंगे। मैंने सुरभि से कहा मैं तुम्हारा पूरा ध्यान रखूंगा और शादी के बाद तुम्हारी जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है और मैं तुम्हें कभी भी कोई तकलीफ नहीं आने दूंगा सुरभि कहने लगी मैं तुमसे शादी करने के पक्ष में नहीं थी लेकिन जब तुमने पापा से बात की तो पापा ने तुम्हारी बहुत तारीफ की और कहने लगे तुम्हें राहुल जैसा लड़का नहीं मिल पाएगा इसलिए मैंने इतनी जल्दी शादी के लिए हामी भरी नहीं तो मुझे अभी कुछ वक्त और चाहिए था। मैंने सुरभि से कहा तुम अपना काम यहां जयपुर में भी कर सकती हो और मुझे उस में कोई आपत्ति नहीं है सुरभि कहने लगी मुझे मालूम है तुम दिल के बहुत अच्छे हो और तुम मुझे किसी भी चीज के लिए कभी मना नहीं कर सकते। सुरभि को मुझ पर पूरा भरोसा था और हम दोनों के बीच बहुत ज्यादा प्यार था कुछ समय बाद हम लोगों की शादी होने वाली थी शादी की तैयारियां हो चुकी थी और जिस दिन मैं दूल्हा बना उस दिन मैं बहुत ज्यादा खुश था। सब कुछ बहुत ही अच्छे से हुआ और आखिरकार मेरी शादी सुरभि से हो ही गई मैं सुरभि से शादी कर के खुश हूं और सुरभि भी मेरे साथ शादी करने से बहुत खुश थी। प्रशांत ने मुझे शादी की बधाई दी और कहा तुम दोनों का जीवन अब एक दूसरे से बंधा हुआ है इसलिए तुम दोनों एक दूसरे का ध्यान रखना मैंने प्रशांत से कहा हां क्यों नहीं मैं जरूर सुरभि का ध्यान रखूंगा। जब हम दोनों की सुहागरात थी तो उस रात मुझे सुरभि के बदन को देखकर बड़ा अच्छा लग रहा था मैंने सुरभि के चेहरे से घूंघट को उठाया और मैंने उसके होठों को चूमना शुरू किया।

उसके होठों को चूमकर मुझे बड़ा अच्छा लगता और वह भी खुश हो जाती मैंने जब अपने लंड को सुरभि के हाथों में दिया तो वह उसे हिलाने लगी मैंने कुछ देर तक तो उसके स्तनों का रसपान किया और उसे बहुत मजा आया। हम दोनों ने काफी देर तक एक दूसरे के बदन को महसूस किया और जब सुरभि के बदन से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर के लिए निकलने लगी तो मैंने अपने लंड को सुरभि के मुंह में डाल दिया। वह मुझे कहने लगी मैंने पहली बार किसी के लंड को अपने मुंह में लिया है मैंने उसे कहा क्यों तुम्हें मजा नहीं आ रहा वह कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और तुम्हारा लंड बड़ा ही स्वादिष्ट है। वह मेरे लंड को अपने गले तक लेकर सकिंग करती जाती उसे बहुत मजा आया और मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। मैंने जब सुरभि की नाभि को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया तो वह उत्तेजना में आ गई और जब मैंने उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटा तो उसकी योनि से गिला पदार्थ निकलने लगा। वह मुझे कहने लगी अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो पाएगा और जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर प्रवेश करवाया तो वह चिल्ला उठी और उसकी योनि से खून की धार निकल आई।

उसकी योनि से बड़ी तेजी से खून निकल रहा था और मुझे उसे धक्के देने में बहुत आनंद आता। मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के दिए जा रहा था मैंने जब उसे घोड़ी बना कर चोदना शुरू किया तो उसका बदन हिल जाता और वह मुझे कहती तुमने मेरे चूत में दर्द कर दिया है। मैंने सुरभि को तेजी से धक्के दिए वह अपनी गोरी और बड़ी चूतड़ों को मुझसे मिलाती और अपने मुंह से मादक आवाज मे सिसकिया लेती मेरा वीर्य मेरे लंड के ऊपर तक पहुंच चुका था और वह कुछ ही देर बाद गिरने वाला था। मैंने सुरभि से कहा मेरा वीर्य पतन होने वाला है सुरभि ने मेरे लंड को अपनी योनि से बाहर निकाला और उसने अपने मुंह में ले लिया। उसने कुछ देर तक मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसा जब मेरा वीर्य बाहर की तरफ गिरा तो उसने मेरा वीर्य को निगल लिया। मैंने सुरभि से कहा तुमने आज मुझे बहुत प्यार दिया जो मैं चाहता था सुरभि ने मेरी इच्छा पूरी कर दी थी और उस रात मुझे इतनी गहरी नींद आई अगले सुबह जब मैं उठा तो मैंने सुरभि से कहा मुझे दोबारा सेक्स करना है। सुबह सुबह ही हम दोनों ने उठकर एक दूसरे के साथ सेक्स का आनंद लिया और उसके बाद सुरभि घर के काम मे लग गई सुहागरात की पहली रात मेरे लिए बड़ी यादगार रही।


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