हाथों में हाथ था

Hathon me hath tha:

antarvasna, hindi sex stories मुझे एक बार अपने ऑफिस की मीटिंग से दूसरे शहर जाना पडा, मैं पहली बार रोहतक में गई थी रोहतक में इस बार हमारी कंपनी ने प्रोग्राम रखा था इसलिए वहां पर लगभग सब जगह के एंप्लॉय आए हुए थे और मुझे भी उस में जाना था क्योंकि वह हमारी बड़ी मीटिंग थी इसलिए उस मीटिंग में मुझे जाना था। मैं जब रोहतक गई तो मैं जिस होटल में गई वहां पर रिसेप्शन में मैंने पूछा कि क्या यहां पर कोई मीटिंग है, वह कहने लगे मैंम यहां पर तो ऐसा कोई भी प्रोग्राम नहीं है, मैं कंफ्यूज हो गई मैंने जब फोन पर एड्रेस दिखाया तो वह कहने लगे कि मैडम हमारी दूसरी ब्रांच है आप वहां पर चले जाइए वहां का यह एड्रेस है।

मुझे लेट हो चुकी थी मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं वहां कैसे पहुँचूँ तभी रिसेप्शन पर एक और व्यक्ति आय और शायद वह भी गलती से दूसरे होटल में पहुंच गए थे क्योंकि एक जैसे नाम होने की वजह से कंफ्यूजन हो रहा था मैंने उन्हें बताया कि वह दूसरे होटल में हैं मैंने उन्हें अपना नाम बताया मेरा नाम सरिता है और मैं भी इस कंपनी में जॉब करती हूं मैं दिल्ली में काम करती हूं, वह कहने लगे कि मैं अहमदाबाद में कंपनी का काम देखता हूं, मैंने उन्हें कहा लेकिन हम लोग वहां कैसे जाए वह कहने लगे कि आप मेरे साथ चलिए मैंने कार बुक की हुई है। मैं कमलेश के साथ चली गई जब मैं उनके साथ गयी तो रास्ते पर हम दोनों बात करते रहे जैसे ही हम लोग होटल में पहुंचे तो वह कहने लगे चलिए हम लोग समय पर पहुंच गए मैंने कमलेश से कहा कि आपका धन्यवाद है यदि आप मुझे समय पर नहीं मिलते तो शायद मैं समय पर नहीं पहुंच पाती क्योंकि मैं पहली बार रोहतक में आई हूं और मुझे भी यहां के बारे में ज्यादा पता नहीं है, वह कहने लगे मैं भी पहली बार ही आया हूं शायद इसी वजह से मैं भी कंफ्यूजन में आ गया। जब होटल के हॉल में हम लोग आए तो वहां पर काफी भीड़ थी और सब कुछ बड़े ही अच्छे से हो गया लेकिन उसके बाद मैंने कमलेश का नंबर ले लिया था कमलेश ने मुझे कहा कि यदि कभी भी आप अहमदाबाद आए तो आप मुझे फोन कर दीजिएगा।

मैंने भी उन्हें कहा कि यदि आपको कभी दिल्ली आना होता है तो आप मुझे बता देना, कमलेश कहने लगे कि दिल्ली में मेरी बड़ी बहन रहती हैं उनकी शादी दिल्ली में ही हुई है और मैं दिल्ली उनसे मिलने के लिए आता रहता हूं क्योंकि हम दोनों की ट्रेन लगभग एक साथ ही थी इसलिए हम दोनों रेलवे स्टेशन भी एक साथ गए और हम दोनों की ट्रेन रात को थी इसलिए हम लोगों ने साथ में डिनर किया मैंने कमलेश के साथ काफी अच्छा समय बिताया कमलेश मुझे बहुत अच्छे लगे और उनका नेचर मुझे काफी पसंद आया वह जिस प्रकार से बात करते है मैं उनकी बातों से खुशी हो जाती हूँ और मैं दिल्ली आ गई कमलेश भी अहमदाबाद जा चुके थे लेकिन मुझे नहीं पता था कि मेरे दिल में कमलेश के लिए अब कुछ और ही चलने लगा मैं जब घर आई तो मुझे एहसास हुआ कि कमलेश मुझे कुछ ज्यादा ही पसंद आया और मैं उनसे प्यार करने लगी हूं लेकिन इससे पहले मेरे साथ कभी भी ऐसा नहीं हुआ था। मैंने कमलेश को फोन किया और उन्हें कहा कि क्या आप अहमदाबाद पहुंच गए, वह कहने लगे कि हां मैं अहमदाबाद पहुंच चुका हूं वह मुझसे पूछने लगे कि क्या आप अपने घर पहुंच गई, मैंने उन्हें कहा हां मैं तो अपने घर पहुंच चुकी हूं लेकिन मेरे पास इससे आगे और कुछ भी बात करने के लिए नहीं था इसलिए मैंने ज्यादा देर बात नहीं की और फोन रख दिया मैंने फोन रख दिया मुझे कमलेश के साथ बात करना अच्छा लग रहा था लेकिन जब मैंने फोन रख दिया तो मुझे अंदर से एक अलग ही फीलिंग आने लगी और मैं और कमलेश जल्दी से एक दूसरे से मिलने वाले थे क्योंकि शायद मेरी किस्मत अच्छी थी कि कमलेश को अपनी बहन के पास आना पड़ा और जब वह दिल्ली आए तो उन्होंने मुझे तुरंत फोन कर दिया और कहा कि मैं दिल्ली आया हूं क्या आप मुझसे मिल सकती हैं, मैंने कमलेश से कहा हां क्यों नहीं। उन्होंने मुझे कहा कि आप मेरी दीदी के घर पर ही आ जाइएगा, मैं कमलेश से मिलने के लिए उनके दीदी के घर पर चली गई और जब मैं कमलेश की दीदी से मिली तो उनका नेचर भी बड़ा अच्छा है और हम लोग एक साथ काफी देर तक बैठे रहे उन्होंने मुझे बताया कि मेरे पति मर्चेंट नेवी में है और वह घर कम ही आते हैं।

मेरी उनसे अच्छी बात होने लगी थी और कमलेश मुझे कहने लगे कि चलो अब तुम दोनों का परिचय तो हो ही चुका है, उन्होंने मुझे कहा कि सरीता जब भी तुम्हें इस तरफ आना हो तो तुम दीदी से मिल लिया करो। उसकी दीदी भी मुझमें बहुत ज्यादा इंटरेस्ट है उन्होंने मुझसे पूछा क्या तुम्हारी शादी अभी नहीं हुई? मैंने उन्हें कहा नहीं अभी कहां मैंने अभी शादी के बारे में सोचा ही नहीं है, उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम्हारी उम्र कितनी है, मैंने उन्हें बताया मेरी उम्र 27 वर्ष है लेकिन अभी तक मैंने शादी के बारे में नही सोचा, वह कहने लगे कि चलो फिर तुम जल्दी शादी के बारे में सोच लो मैं तुम्हारे लिए लड़का देख लेती हूं, मैंने उन्हें कहा आप मेरे लिए लड़का भला कहां देखेंगे, वह कहने लगी कि मेरे देवर भी मर्चेंट नेवी में है और उनके लिए तुम बिल्कुल सही रहोगे लेकिन मेरे दिल में तो सिर्फ कमलेश के लिए जगह थी और कमलेश को यह बात पता नहीं थी मैंने सोचा कि मैं कमलेश को यह बात बता दूं परंतु मैंने कमलेश से यह बात नहीं कही और उससे कहा कि मैं अभी घर चलती हूं फिर तुमसे मिलने आउंगी, कमलेश कहने लगे कि आज तुम्हें यही रुक जाओ।

उसकी दीदी ने भी मुझे कहा कि आज तुम यही रुक जाओ वैसे भी मैं घर पर अकेली रहती हूं मुझे भी कंपनी मिल जाएगी, मैंने जाते वक्त कमलेश की दीदी से कहा कि आप अकेले कैसे रह लेती हैं, वह कहने लगी बस मुझे आदत हो चुकी है मैं वहां से अपने घर चली गयी और कुछ दिनों बाद मैं दोबारा उनसे मिलने के लिए चली गई। कमलेश अभी कुछ दिनों के लिए और रुकने वाले थे और जिस वजह से मैं कमलेश से मिलने के लिए चली गई मैं जब कमलेश से मिली तो उस दिन शायद कमलेश की दीदी कहीं गई हुई थी कमलेश कहने लगे कि दीदी आज कहीं गई है मैं घर पर अकेला हूं बस कुछ देर बाद दीदी आती होगी, मैंने कहा चलो तब तक हम दोनों ही बात कर लेते हैं मुझे भी कमलेश के साथ बैठने का मौका मिल चुका था और मैंने उस दिन कमलेश से पूछा कि क्या तुम किसी लड़की को पसंद करते हो? वह कहने लगे कि नहीं मैंने तो अभी तक किसी भी लड़की के बारे में नहीं सोचा। मैंने कमलेश का हाथ पकड़ते हुए कमलेश से अपने दिल की बात कह दी कमलेश कहने लगे देखो सरिता मैंने तुम्हारे बारे में कभी भी ऐसा कुछ नहीं सोचा कहीं ऐसा ना हो कि तुम मेरे बारे में कुछ गलत समझ लो, मैंने कमलेश से कहा लेकिन मैं तो तुम्हें बहुत पसंद करती हूं और जब पहली बार मैं तुमसे मिली तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं तुम्हें कई वर्षों से जानती हूं और मैं जब घर लौट आई तो मुझे एक अलग ही बेचैनी सी महसूस होने लगी मुझे नहीं पता था कि यह सब मेरे साथ क्यों हो रहा है लेकिन मुझे तुम्हें लेकर एक अलग ही फीलिंग है। कमलेश ने भी मेरा हाथ पकड़ लिया, हम दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर बैठे रहे। कमलेश ने भी शायद मुझे स्वीकार कर लिया था लेकिन मुझे कहां पता था कि हमारे बीच और भी कुछ हो जाएगा। कमलेश ने जब मेरे होठों पर अपने उंगली को रखा तो मुझे अच्छा लगने लगा जैसे ही कमलेश ने मेरे होठों को चूमना शुरू किया तो मेरे अंदर से गर्मी निकलने लगी और मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा।

कमलेश को भी अच्छा लगने लगा था जैसे ही कमलेश ने मेरे स्तनों को दबाना शुरू किया तो मुझे भी बहुत अच्छा लगने लगा। कमलेश ने मेरे स्तनों को अपने मुंह में लिया तो मैंने कमलेश को अपना बदन सौप दिया था कमलेश से मै अपनी सील तुड़वाना चाहती थी और हुआ भी ऐसा ही कमलेश ने अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डाल दिया। जैसे ही उसका मोटा लंड मेरी चूत में प्रवेश हुआ तो मुझे बहुत दर्द हुआ और उस दर्द के साथ ही मेरी सील भी टूट गई मेरी चूत से खून आने लगा और मेरी चूत से बड़ी ही तेजी से खून निकल रहा था। मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा था कमलेश मुझे लगातार तेजी से धक्के दे रहे थे, कमलेश ने मुझे बहुत देर तक चोदा जैसे ही कमलेश का गरमा गरम वीर्य मेरी योनि के अंदर गिर गया तो कमलेश मुझे कहने लगे सरिता मैंने तुम्हारे बारे में कभी भी ऐसा नहीं सोचा था लेकिन जब मुझे पता चला कि तुम मुझसे प्रेम करती हो तो मैं भी अपने आप पर काबू नहीं रख पाया क्या तुम्हें बुरा तो नहीं लगा।

मैंने कमलेश से कहा नहीं कमलेश इसमें भला बुरा लगने वाली क्या बात है जब मैं तुमसे प्रेम करती हूं तो अब तुम मेरे ही हो और तुम्हारे साथ यदि मैंने शारीरिक संबंध बना लिया तो इसमें कोई गलत नहीं है। कमलेश बड़े ही शरीफ हैं लेकिन उनका लंड बड़ा ही मोटा है जब दोबारा से उन्होंने मुझे डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया तो मेरे मुंह से सिसकियां निकलने लगी मुझे बहुत तकलीफ होने लगी। मुझे तब पता चला कमलेश का लंड कितना मोटा है जब हम दोनों के बीच दोबारा से सेक्स हुआ था। मेरे अंदर उस वक्त उत्तेजना जाग उठी थी जब कमलेश का वीर्य गिर गया। उसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहने लिए लेकिन मेरी चूत में बहुत दर्द हो रहा था कुछ ही देर बाद कमलेश की दीदी लौट आई वह मुझे कहने लगी सरिता तुम कब आई। मैंने उनसे कहा बस कुछ ही देर पहले पहुंची हूं उस वक्त हम दोनों साथ में ही बैठे हुए थे।


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