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हाईवे के किनारे की वो सुनसान जगह

Highway ke kinare ki wo sunsan jagah:

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मेरा नाम प्रशांत है मैं राजस्थान का रहने वाला हूं, मैं राजस्थान के एक छोटे से गांव में रहता हूं और वहां पर मेरी एक दुकान है उससे ही मेरी  जीविका चलती है। मैंने अभी तक शादी नहीं की है, मेरे पिताजी मेरे पीछे पडे हैं और कहते हैं कि तुम शादी कर लो, मैंने उन्हें कहा नहीं पिताजी मुझे अभी शादी नहीं करनी, वह मुझे कहते हैं कि तुम्हें अपने जीवन में क्या करना है, तुमसे जब भी कुछ बात करता हूं तो तुम हमेशा मुझे उसका उल्टा जवाब दे देते हो इसीलिए तुमसे बात करना ही व्यर्थ है। उनके और मेरे बीच में बहुत झगड़े रहते हैं, मुझे समझ नही आता कि वह मुझ पर अपनी हर चीजों को क्यों थोपते हैं,  वह कहते हैं कि जो मैं कहूंगा तुम वही करो इसी वजह से मैं उनसे ज्यादा बात नहीं करता। मेरे  परिवार में मेरे तीन बड़े भाई और हैं उन तीनों ने शादी कर ली है लेकिन मैंने अभी तक नहीं शादी की है, वह तीनो भी मुझे कहते हैं कि तुम शादी कर लो, मैं उन्हें कहता हूं कि मुझे अपने जीवन में कुछ और भी करना है, मैं नहीं चाहता कि मैं शादी कर के शादी के बंधनों में बंध जाऊं और अपने जीवन को यहीं समाप्त कर दूँ।

मेरी उन लोगों से सोच थोड़ा अलग है इसीलिए मैं उनसे ज्यादा बात नहीं करता, मैं सुबह के वक्त अपनी दुकान पर आ जाता हूं और शाम को मैं अपना काम कर के लौट जाता हूँ। एक दिन मैं जयपुर चला गया, जयपुर मेरा कुछ काम था इसलिए मुझे काम के सिलसिले में जयपुर जाना पड़ा, मैं जयपुर अपने रिश्तेदार के घर पर ही रुका हुआ था, मैंने सोचा चलो आज इसी बहाने घूम लिया जाए, वैसे तो मेरा जयपुर अक्सर आना-जाना लगा रहता है लेकिन उस दिन मेरे लिए कुछ अलग ही अनुभव था। मैंने अपने उन्ही रिश्तेदार से बाइक मांगी और मैं घूमने के लिए निकल पड़ा, रास्ते में मेरा पानी पूरी खाने का बड़ा मन हुआ मैंने बाइक को सड़क के किनारे लगाया और पानी पूरी खाने चला गया, मैं जब पानी पुरी खा रहा था तो उस वक्त मेरे बिल्कुल सामने एक लड़की पानी पुरी खा रही थी और उसके साथ उसके परिवार के सदस्य भी थे, वह लोग देखने से कहीं बाहर से आए हुए लग रहे थे और शायद वह लोग जयपुर घूमने ही आए थे।

जैसे ही उस पानीपुरी वाले ने उस लड़की को पानी पुरी दी तो उसके हाथ से वह प्लेट फिसलते हुए मेरे कपड़ों पर आ गिरी, जब वह मेरे कपड़ों पर गिरा तो मेरे कपड़े पूरे खराब हो गए, मैंने उस दिन सफेद रंग की कमीज पहनी हुई थी, सफेद रंग की कमीज में बहुत से दाग लग गए। वह मुझे कहने लगी सॉरी मैंने आपके कपड़े खराब कर दिया, मैंने उसे कहा कोई बात नहीं लेकिन उसे अपनी गलती का बहुत एहसास था, उसके मम्मी पापा भी कहने लगे कि नहीं बेटा इसमें हमारी ही गलती है, वह लोग मुझे जिद करते हुए एक कपड़े की दुकान में ले गए और उन्होंने वहां से मुझे एक शर्ट दिलवा दी, वह लोग बड़े ही सज्जन और अच्छे थे इसीलिए मैं भी उनसे अपने आप को ज्यादा देर तक बिना बात करे हुए नहीं रह पाया। मैंने उनसे पूछ लिया कि आप लोग कहां से आए हैं, वह मुझे कहने लगे कि हम लोग कोलकाता से आए हैं और कुछ दिनों के लिए हम लोग यहीं रहने वाले हैं। मैंने उस लड़की का नाम भी पूछा उसका नाम रचना है, रचना बात करने से बहुत ही अच्छी लग रही थी और वह पढ़ी लिखी भी थी, वह लोग मुझसे पूछने लगे कि क्या तुम यहीं के रहने वाले हो, मैंने उन्हें कहा कि नहीं मैं यहां का रहने वाला नहीं हूं मैं भी अपने किसी रिश्तेदार के घर आया हूं, मैं एक गांव का रहने वाला आम नागरिक हूं। वह लोग मेरी बात से बहुत प्रभावित थे और मुझे कहने लगे कि क्या तुम हमें कुछ दिनों के लिए घुमा सकते हो, तुम्हें तो जयपुर के बारे में सब कुछ पता होगा, मैंने कहा हां मुझे तो यहां के बारे में सब कुछ पता है और मैं आपको घुमा दूंगा, उसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं है, जब मैंने उन्हें यह बात कही तो उनके चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान आ गई। मैं अगले दिन से उन लोगों को अपने साथ घुमाने लगा, उनके पास कार भी थी, मैंने उन्हें लगभग सारी जगह घूमाया, मैं जितने दिन उनके साथ था उसी दौरान मेरी रचना के साथ नजदीकियां बढ़ गई और हम दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई। मेरा भी अब उसे छोड़कर जाने का मन नहीं था लेकिन मेरे मन में यह दुविधा थी कि क्या उसकी तरफ से भी मेरे लिए ऐसा कुछ है या सिर्फ मैं ही अकेले अपने मन में यह ख्याल लेकर बैठा हूं, मैंने सोचा कि जाने से पहले उससे मैं एक बार अपने दिल की बात कह दूं, यदि वह ना भी कहेगी तो मुझे कोई तकलीफ नहीं है क्योंकि उसके साथ मैंने अच्छा समय बिताया है और उसके साथ मैं जितना भी समय बिता पाया मुझे बहुत खुशी हुई, यही अपने दिल में सोचते हुए मैंने उसे बुला लिया।

मैंने उसे एक पार्क में बुलाया, हम लोग वहीं बैठ कर बात कर रहे थे, कुछ देर तक तो हम दोनों एक दूसरे के बारे में बात करते रहे लेकिन जब मैंने अपने दिल की बात रचना से कही तो वह कहने लगी कि मैं भी तुम्हें पसंद करती हूं लेकिन मेरे परिवार के सदस्य तुमसे मेरी शादी कभी नहीं करवा सकते और कुछ समय बाद मैं विदेश जाने वाली हूं। जब उसने यह बात कही तो मैंने उसे कहा कोई बात नहीं तुम जैसा भी सोचती हो मैं तुम्हारी बातों का सम्मान करता हूं, शायद यही बात मेरी उसके दिल में लग गई और वह कहने लगी तुम एक अच्छे व्यक्ति हो। रचना मुझे कहने लगी मैं आज का दिन तुम्हारे साथ ही बिताना चाहती हूं, उसने जब मुझसे यह बात कही तो मैंने भी सोचा कि क्यों ना आज मैं रचना के साथ ही पूरा दिन बिताऊ। हम लोग काफी देर तक तो पार्क में बैठे हुए थे, जब हम लोग खड़े उठे तो रचना ने मेरा हाथ पकड़ लिया, मैं उसका हाथ पकड़ कर पार्क से बाहर निकला।

जब उसने मेरा हाथ अपने हाथों में पकड़ा हुआ था तो मेरे दिल की धड़कनें बड़ी तेज हो रही थी, मैंने सोचा मैं रचना को कहां लेकर जाऊं। मैंने रचना को अपनी बाइक में बैठा लिया, हम लोग इधर उधर घूमने लगे लेकिन उसको देखकर मेरा मन खराब होने लगा था, मैं उसे गले लगाना चाहता था। हम लोग बातें करते करते शहर से बाहर की तरफ चले गए, जब हम लोग हाईवे पर थे तो मैं उसे एक सुनसान जगह पर ले गया, हम लोग वहीं पर अपनी बाइक लगाकर बैठ गए, हम दोनों बात कर रहे थे मैंने रचना की जांघ पर हाथ रखा हुआ था। कुछ देर तक तो मुझे कुछ भी नहीं हुआ लेकिन जैसे ही मेरे दिमाग में रचना को लेकर गंदे ख्याल आने लगे तो मैंने उसकी जांघों को सहलाना शुरू कर दिया। वह अपने आप को नहीं रोक पाई, मैंने जैसे ही रचना के होंठो को चूमना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी, मुझे तुम्हारे साथ किस कर के बहुत अच्छा लग रहा है। उसने मेरे होठों को काफी देर चूसा जब हम दोनों की इच्छा भर गई तो मैंने रचना के स्तनों को उसके सूट से बाहर निकालते हुए चूसना शुरू कर दिया। वह मुझे कुछ नहीं कह रही थी लेकिन उसके अंदर से जो गर्मी निकलती वह मुझे साफ पता चल जाती, वह भी ज्यादा समय तक अपने आपको ना रोक सकी, जैसे ही मैंने रचना के पेट पर अपनी जीभ को लगाया तो वह पूरे मूड में हो गई और उसने अपनी सलवार को नीचे उतार दिया। जब उसने अपनी सलवार को नीचे उतारा तो उसकी चिकनी चूत ने मेरे दिमाग मे घर कर लिया, मैंने उसकी चूत मैं थोड़ी देर तक उंगली लगाई और कुछ देर तक मैं उसकी चूत को चाटता रहा। मैंने उसे वहीं कोने में घोड़ी बनाते हुए उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया, जब मेरा लंड रचना की योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो रचना के मुंह से आवाज निकालने लगी, उसकी योनि से खून भी बड़ी तेज गति से निकल रहा था और उतनी ही तेजी से मैं भी उसे धक्के मार रहा था। मैंने रचना को बहुत देर तक धक्के मारे लेकिन जब उसकी चूत मेरे लंड से टकराती तो उससे जो आवाज पैदा होती वह मेरे दिमाग मे जाती और मेरे लंड से कुछ ही समय बाद वीर्य बाहर की तरफ निकलने वाला था। मैंने रचना से कहा मेरा वीर्य निकलने वाला है, वह कहने लगी मैं तुम्हारे लंड को अपने मुंह में लेना चाहती हूं, उसने मेरे लंड को हिलाते हुए मुंह में ले लिया और कुछ ही सेकंड बाद मेरा वीर्य जब उसके मुंह के अंदर गिरा तो वह खुश हो गई। उसके बाद मैंने उसके साथ एक बार और सेक्स किया, जब हम दोनों का मन भर गया तो मैंने उसे होटल छोड़ दिया।


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