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जीजा ही मेरा पति है

Jija hi mera pati hai:

hindi sex story, antarvasna मेरा नाम सविता है मैं बेंगलुरु की रहने वाली हूं, मैं मुंबई में पढ़ाई कर रही थी उसी दौरान मेरी बहन की भी सगाई हो गई, मेरी बहन का नाम प्रतीक्षा है। जब उसकी सगाई हुई तो उसने मुझे अपने होने वाले पति की तस्वीर भेजी वह दिखने में काफी अच्छे थे, मेरी बहन प्रतीक्षा बहुत ही खुश थी मैंने प्रतिक्षा से अपने होने वाले जीजा जी क्या नाम पूछा वह कहने लगी उनका नाम गिरीश है। जब मैं उससे बात कर रही थी तो वह इतनी ज्यादा खुश थी कि मुझे उसकी इस बात से अंदाजा लग गया था कि वह बहुत ही ज्यादा खुश है लेकिन मैं उसकी सगाई में नहीं जा पाई क्योंकि मेरे कॉलेज में मेरे एग्जाम चल रहे थे इसलिए मेरा जाना नहीं हो पाया परंतु जब मेरे एग्जाम खत्म हुए तो मैं तुरन्त बेंगलुरु चली गई, जब मैं बेंगलुरु गयी तो मेरे मम्मी पापा बहुत खुश थे मेरी बहन प्रतिक्षा बहुत ही ज्यादा खुश थी वह मुझे कमरे में ले गई और कहने लगी मैं तुम्हें गिफ्ट दिखाती हूं मुझे गिरीश ने कल ही गिफ्ट दिया है, उसने मुझे जब वह गिफ्ट दिखाया तो मैं भी बहुत खुश थी मैंने प्रतीक्षा से कहा तुम तो बहुत खुश लग रही हो, वह कहने लगी हां मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि गिरीश से मेरी सगाई हो जाएगी मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे कि मैं कोई सपना देख रही हूं, मैं अपने सपनों में जिस राजकुमार को देखा करती थी वह गिरीश ही है।

मैंने प्रतिक्षा से कहा तुम कुछ ज्यादा ही तारीफ नहीं कर रही, वह कहने लगी नहीं जब तुम गिरीश से मिलोगी तो तुम्हें भी ऐसा ही लगेगा, मैंने प्रतीक्षा से कहा जब तुम इतनी तारीफ कर ही रही हो तो लगता है अब उनसे मिलना ही पड़ेगा। जब हम दोनों बात कर रहे थे तो उसी दौरान गिरीश का भी फोन आ गया और जब उनका फोन आया तो प्रतीक्षा फोन पर बात करने लगी मैंने प्रतीक्षा से कहा मैं फ्रेश हो जाती हूं, उसने अपना सिर हिलाते हुए कहा ठीक है तुम फ्रेश हो जाओ और फिर वह फोन पर ही बातें करने लगी मैं फ्रेश होने के लिए चली गई, मैं जब बाथरूम से बाहर निकली तो तब भी प्रतीक्षा फोन पर ही बात कर रही थी मैंने उसे डिस्टर्ब नहीं किया मैं बाहर हॉल में जाकर बैठ गई मेरी मम्मी भी हॉल में बैठी हुई थी, मैं मम्मी से बात करने लगी। मैं जब मम्मी से बात कर रही थी तो मम्मी बहुत ही खुश नजर आ रही थी मैंने मम्मी से पूछा आप सब लोग बहुत ही खुश नजर आ रहे हैं, वह कहने लगी हमने तो कभी सोचा नहीं था कि इतने अच्छे घर से हमें रिश्ता आ जाएगा लेकिन यह सब तुम्हारे मामा की वजह से हुआ है उन्होंने ही गिरीश के परिवार से हमें मिलाया और उन्होंने प्रतिक्षा को देखते ही पसंद कर लिया।

मैं मन ही मन सोचने लगी कि सब लोग गिरीश की इतनी तारीफ कर रहे हैं तो लगता है अब उनसे मिलना ही पड़ेगा। मैं और मम्मी बात कर रहे थे तभी प्रतीक्षा भी आ गई और वह कहने लगे आप दोनों क्या बात कर रहे हो? मैंने प्रतीक्षा से कहा बस गिरीश के बारे में बात कर रहे थे। मम्मी भी बहुत तारीफ कर रही है तो फिर तुम कब मुझे गिरीश से मिलवा रही हो? वह कहने लगी हम लोग कल ही गिरीश से मिल लेते हैं। मैंने प्रतीक्षा से कहा ठीक है हम लोग कल गिरीश से मिल लेते हैं, अगले दिन ही हम लोग गिरीश से मिलने चले गए, मैं जब उससे मिली तो मुझे गिरीश को देखते ही जैसे प्यार हो गया और मैं उस पर फिदा हो गई मुझे जब प्रतीक्षा ने गिरीश से मिलवाया तो मैंने गिरीश से कहा सब लोग आपके घर में बहुत तारीफ कर रहे हैं तो मैंने सोचा कि आप से मिल लिया जाए, गिरीश भी पीछे से मेरी तरफ अट्रैक्ट हो रहा था लेकिन मुझे अपनी बहन का ख्याल आ रहा था गिरीश भी मुझसे बात कर रहा था और वह मुझसे पूछने लगा की तुम मुंबई से कॉलेज कर रही हो, मुझे प्रतिक्षा ने बताया, मैंने उसे कहा हां मैं मुंबई से कॉलेज कर रही हूं, वह कहने लगा मेरे भी काफी दोस्त मुंबई में रहते हैं मैंने भी मुंबई से ही अपनी पढ़ाई की थी। गिरीश मेरी बहुत ज्यादा तारीफ कर रहा था मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वह मुझ पर ही लाइन मार रहा है, हम लोग आधे घंटे तक साथ में बैठे रहे उसके बाद मैं और प्रतिक्षा घर के लिए निकल पड़े, मैं जब घर पहुंची तो मुझे गिरीश का मैसेज आया और वह कहने लगे कि मुझे तुम बहुत अच्छी लगी, मैं तो जैसे दुविधा में थी मुझे कुछ समझ नहीं आया कि यह सब क्या हो रहा है मैंने मैसेज का रिप्लाई नहीं किया। मैंने जब गिरीश के नंबर पर फोन किया तो वह मुझे कहने लगे मुझे आज तुमसे मिलकर बहुत अच्छा लगा और ना जाने मुझे ऐसा क्यों लगा कि जैसे मैं तुम्हें पसंद करता हूं, मैंने उसे कहा लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकता तुम्हारी सगाई मेरी बहन से हो चुकी है और वह बहुत ज्यादा खुश है मैं उसकी खुशी को ठेस नहीं पहुंचा सकती।

गिरीश कहने लगा मेरा दिल तो तुम्हारे लिए धड़कने लगा है। मेरी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था मैं बहुत ज्यादा दुविधा मे थी हम दोनों की फोन पर बातें होने लगी। गिरीश मुझ पर फ़िदा हो चुका था मेरा भी मन उसे मिलने का होने लगा एक दिन मै गिरीश से मिलने के लिए उसके घर चली गई। उस दिन गिरीश के घर पर कोई नहीं था जब मैं उससे मिलने गई तो मुझे गिरीश ने अपनी बाहों में ले लिया और कहने लगा सविता तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। जब गिरीश ने मुझे अपनी बाहों में लिया तो मुझे भी अंदर से एक अलग ही तरह की फीलिंग आने लगी मैंने भी गिरीश के होठों को चूमना शुरू किया। जैसे ही मैंने उसे किस किया तो वह मुझे कहने लगा मुझे तो तुमसे ही शादी करनी है। मैंने उसे समझाया और कहा यह संभव नहीं है लेकिन हम दोनों एक दूसरे के साथ रह सकते हैं। यह कहते हुए उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया, जब मैं बिस्तर पर लेटी तो उसने मेरे स्तनों को दबाना शुरू कर दिया।

वह मेरे स्तनों को बहुत तेजी से दबा रहा था वह इतनी जोर से मेरे स्तनों को दबाता कि मुझे दर्द होने लगा। मेरे टाइट और सुडौल स्तनो में दर्द होने लगा था मैंने गिरीश से कहा तुम मेरे कपड़े उतार दो। उसने मेरे कपड़े उतारे उसके हाथों का स्पर्श मेरे स्तनों पर हुआ तो मैं उत्तेजित हो गई। उसने मेरे स्तनों को अपने होठों में लेकर चूसा तो मुझे और भी ज्यादा अच्छा लगता। जैसे ही गिरीश ने अपने होठों को मेरे पेट पर लगाना शुरू किया तो मेरी सिसकियां निकलनी शुरू हो गई यह मेरे लिए पहला अनुभव था लेकिन मुझे बहुत अच्छा महसूस होता जब वह इस प्रकार से मेरे साथ करता। मैंने भी अपने सलवार के नाड़े को खोलते हुए सलवार को उतार दिया उसने मेरी पैंटी को उतार तो मेरी चूत पूरी गिली हो चुकी थी। गिरीश ने मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया वह मेरी चूत को चाट रहा था मुझे बहुत अच्छा लगता। जैसे ही गिरीश ने अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डाला तो मेरे खून की पिचकारी बाहर की तरफ निकल आई मुझे बहुत दर्द होने लगा लेकिन मुझे बहुत अच्छा भी महसूस हो रहा था। मैं अपने मुंह से लगातार तेज आवाज में चिल्ला रही थी मेरी चूत की गर्मी की बढ गई मैं ज्यादा समय तक गिरीश के लंड की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाई, जैसे ही मैं झड गई तो गिरीश मुझे कहने लगा सविता तुम तो बड़ी ही सेक्सी फिगर की लड़की हो तुम्हारी चूत तो बहुत टाइट है। वह मुझे बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था जिस प्रकार से उसने मुझे चोदा मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गई। गिरीश का वीर्य पतन हुआ तो मैंने उसे गले लगा। मैने उसे अपनी कसम दी और कहा तुम कभी भी इस बारे में किसी से बात नहीं करोगे और तुम्हें प्रतीक्षा से शादी करनी होगी। उसने प्रतीक्षा से शादी कर ली अब भी हम दोनों एक साथ सेक्स का मजा लेते हैं। जब भी मेरा मन होता है तो मै प्रतीक्षा से मिलने के बाहने चली जाती हूं जब गिरीश का मन होता है तो वह मुझे फोन कर लिया करता है इस प्रकार से हम दोनों एक दूसरे के साथ रहते हैं प्रतिक्षा भी अपनी शादीशुदा जिंदगी से बहुत खुश है।


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