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कमसिन बाला के घर में चूत चुदाई का मजा

Kamsin bala ke ghar me chut chudai ka maja:

antarvasna, hindi sex stories

मेरा नाम संकेत है मैं पटना का रहने वाला हूं। मैं एक अच्छे पद पर हूं और मेरी शादी भी हो चुकी है। मेरी शादी को दो वर्ष हुए हैं। मैं अपने घर में ज्यादा वक्त नहीं दे पाता इसीलिए मेरी पत्नी को मुझसे यह शिकायत रहती है कि आप मुझे बिल्कुल भी समय नहीं देते। मैं उसे कहता हूं कि मेरे काम से मुझे फुर्सत ही नहीं मिलती तो मैं तुम्हें कहां से समय दे पाऊंगा। मेरी शादी के बाद मैं हनीमून पर उसे बाली भी लेकर गया था लेकिन उसके बाद से मैं कभी भी उसे घुमाने के लिए लेकर नही गया और ना ही मैं कभी उसके लिए वक्त निकल पाता हूं। इस बात का मुझे भी एहसास है लेकिन समय की कमी के चलते मैं अपने परिवार के सदस्यों को बिल्कुल भी समय नहीं दे पाता और अपने काम में ही व्यस्त रहता हूं।

एक दिन मैं सुबह अपनी कार से निकल रहा था। मैं अपने घर से कुछ ही दूरी पर निकला था तो तभी आगे से एक लड़की बड़ी तेजी से आ रही थी। वह इतनी तेजी में थी कि उसे मेरी कार दिखाई नहीं दी और वह मेरी गाड़ी से आकर टकरा गई। वह तो  शुक्र है कि मैं उस वक्त गाड़ी बहुत धीरे चला रहा था क्योंकि वहां पर ट्रैफिक लगा हुआ था। जब वह मेरी गाड़ी से टकराइ तो मैं जल्दी से गाड़ी से नीचे उतर गया। वह वही नीचे लेटी हुई थी। उसके पैर में हल्की सी चोट आ गई थी। मैंने उसे उठाया और अपनी गाड़ी में बैठाते हुए उसे नजदीक के अस्पताल में ले गया। मैं जब उसे अस्पताल में ले गया तो डॉक्टरों ने उसके पैर पर मरहम पट्टी कर दी। मैंने डॉक्टर से पूछा तो वह कहने लगे कि सर अब यह ठीक हैं आप इन्हें घर ले जा सकते हैं लेकिन इनके पैर में हल्की सी मोच आई हुई है और इन्हें चलने मत दीजिएगा। डॉक्टर को लगा शायद यह मेरी पत्नी है लेकिन मैं तो उस लड़की को जानता भी नहीं था। मैंने जब उस लड़की से बात की तो उसका नाम सुरभि है। सुरभि मुझे कहने लगी की मेरी गलती की वजह से आपको भी आज इतनी तकलीफ झेलनी पड़ी। मैंने उससे कहा नहीं कोई बात नहीं कभी कबार ऐसा हो जाता है।

मैंने सुरभि से पूछा तुम कहां रहती हो? सुरभि ने मुझे अपना एड्रेस दिया और मैं उसे अपने साथ अपनी कार में लेकर चला गया। मैं उसे उसके घर पर छोड़ कर अपने दफ्तर के लिए निकल गया। मेरे दिमाग में सिर्फ यही चल रहा था कि यदि उस वक्त कार तेजी से चलती तो शायद बड़ी दुर्घटना हो सकती थी लेकिन मैंने सोचा चलो अब तो यह हो चुका है और सुरभि भी ठीक है। मैं उसके बाद अपने काम पर लग गया। करीब एक महीने बाद मेरी मुलाकात सुरभि के साथ हुई। सुरभि ने मुझे देखते ही पहचान लिया। मैं उस वक्त अपने किसी दोस्त का इंतजार कर रहा था। सुरभि मेरे पास आई और कहने लगी सर आप यहां क्या कर रहे हैं? मैंने उसे कहा कि मैं अपने दोस्त का इंतजार कर रहा हूं। वह यहीं पास में कहीं रहते हैं लेकिन मुझे उनका घर नहीं पता। सुरभि मुझे कहने लगी सर आप मेरे साथ मेरे घर पर चलिए। मैंने उसे कहा नहीं मैं तुम्हारे घर पर क्या करूंगा। वह कहने लगी प्लीज आप मेरे साथ मेरे घर पर चले। उस दिन आपने मेरी इतनी मदद की। यदि आपकी जगह कोई और होता तो शायद वह मुझे वहीं छोड़कर निकल जाता लेकिन आप एक अच्छे व्यक्ति हैं। मैंने उसे कहा ठीक है मैं थोड़ी देर बाद अपने दोस्त से मिलकर तुम्हारे घर पर आ जाऊंगा। वह कहने लगी कि आपको मेरे घर पर जरूर आना है। मैंने सुरभि से कहा हां मैं तुम्हारे घर पर आ जाऊंगा। यह कहते हुए चली गई और उसके जाने के 10 मिनट बाद मेरा दोस्त भी वहां पर आ गया। मुझे उससे कुछ जरूरी काम था इसलिए मैं उसके साथ बैठकर बात करने लगा। मैं उसके साथ एक घंटे तक रुका। जब वह अपने घर चला गया तो मैंने सोचा कि क्या मुझे सुरभि के घर जाना चाहिए लेकिन फिर मुझे लगा कि वह मुझे दिल से बुला रही है तो मुझे उसके घर जाना चाहिए। मैं सुरभि के घर चला गया और जब मैं सुरभि के घर पर गया तो वह मुझे कहने लगी आप मेरे घर पर आए मैं बहुत ही खुशी हुई। मैंने उससे पूछा आज तुम्हारी मम्मी नहीं दिखाई दे रही? मैं उसकी मम्मी से पहले भी मिल चुका था। वह कहने लगी मम्मी बस आती ही होगी। अभी वह बाहर गए हुए हैं।

सुरभि अपने घर में इकलौती हैं। वह मुझे कहने लगी सर आज आप मेरे घर के पास मुझे दिखाई दिये तो मुझे लगा उस दिन आप मेरे घर नहीं रुक पाए इसलिए मैं आज आपको अपने घर पर बुला लूँ। आप उस इन बड़ी जल्दी में निकल गए। मैंने सुरभि से कहा हां उस दिन मुझे मेरे ऑफिस के लिए देर हो रही थी इसलिए मैं जल्दी से निकल गया था। मैंने उससे पूछा अब तुम्हारा पैर कैसा है? वह कहने लगी अब तो पहले से ठीक है लेकिन अभी हल्का दर्द होता है और जब भी मेरे पैर में दर्द होता है तो मैं मालिश कर लेती हूं उससे थोड़ा बहुत आराम मिल जाता है। मैंने सुरभि से कहा वह तो उस दिन अच्छा हुआ कि तुम तेजी से नहीं आ रही थी और मैं भी बड़ी धीमे से गाड़ी चला रहा था यदि गाड़ी तेज होती तो शायद बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। वह कहने लगी हां सर उस दिन तो मेरी किस्मत अच्छी थी जो मुझे ज्यादा चोट नही आई। मैंने सुरभि से कहा तुम अपना पैर दिखाओ तुम्हारा पैर कैसा है? मैंने जब उसके पैर पर हाथ लगाया तो उसकी जांघ देखकर मेरा मूड खराब होने लगा क्योंकि उसकी जांघ पर चोट लगी थी। मैंने उसे कहा क्या तुम्हें दर्द हो रहा है वह कहने लगी हां थोड़ा सा दर्द हो रहा है। मैंने उसके पैर को हल्का सा दबाया तो वह कहने लगी मुझे थोड़ा दर्द हो रहा है लेकिन जब मैंने उसके पैर को सहलाते हुए उसकी योनि की तरफ अपने हाथ को बढ़ाना शुरू किया तो वह पूरे मूड में हो गई।

मैंने जब उसकी योनि पर अपनी उंगली को लगाना शुरू किया तो वह इतनी ज्यादा मूड में हो गई थी उसने मुझे किस करना शुरू कर दिया। मुझे उसके होठों को चूस कर बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने उसके होठों को काफी देर तक चूसा। जब हम दोनों पूरे मूड में हो गए तो मैंने उसके कपड़े जल्दी में खोले और जैसे ही मैंने उसके कपड़े खोले तो उसके नंगे बदन को देखकर मेरा लंड उसकी योनि में जाने को बेताब होने लगा। मैंने सुरभि से कहा तुम मेरे लंड को कुछ देर तक चूसो। उसने मेरे लंड का रसपान बड़े अच्छे से किया। जब मैंने अपने लंड को उसकी योनि पर लगाया तो वह मचल रही थी। उसकी योनि बड़ी टाइट और चिकनी थी। मैंने जब अपने कडक लंड को उसकी योनि के अंदर डाला तो वह चिल्लाने लगी। वह कहने लगी सर आपने तो मेरी चूत फाड़ दी मैंने भी उसकी योनि के अंदर तक अपने पूरे लंड को डाल दिया था। उसकी योनि से खून की धार बाहर की तरफ निकल रही थी। उसकी उम्र ज्यादा नहीं थी इसलिए उसकी योनि से खून इतनी तेजी से बाहर की तरफ आ रहा था। जैसे जैसे उसके खून की धार बाहर की तरफ निकलती तो वैसे ही मेरा मूड और भी ज्यादा खराब हो जाता। मैंने उसके दोनों पैरों को इतना चौड़ा कर दिया कि मेरा लंड आसानी से उसकी योनि के अंदर बाहर होने लगा था। जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने अपने लंड को उसकी योनि से निकालते हुए उसके स्तनों पर अपने वीर्य का छिड़काव कर दिया। जब मेरा वीर्य उसके स्तनों पर गिरा तो उसे बहुत अच्छा महसूस हुआ। थोड़ी देर में बैठा हुआ था मैंने जब उसे घोड़ी बनाया तो उसकी योनि से खून बाहर की तरफ निकल रहा था। वह मुझे कहने लगी आप मुझे डॉगी स्टाइल में चोदो। मैंने उसे डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया और जब मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता तो उसके अंदर की गर्मी भी निकल जाती। मेरा लंड भी बुरी तरीके से छिल गया था मैं बड़ी तेज गति से अपने लंड को उसकी योनि के अंदर बाहर कर रहा था। मैं इतनी तेजी से उसकी योनि के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था कि मेरा लंड पूरा सख्त हो गया और उसकी योनि बाहर की तरफ को तरल पदार्थ छोडने लगी। उसकी योनि इतनी चिकनी हो गई थी मुझे उसे झटके देने में बहुत मजा आ रहा था और उसकी चूतडो का रंग भी मैंने पूरा लाल कर दिया था। मैंने जैसे ही उसकी चिकनी चूत के अंदर अपने वीर्य को प्रवेश करवाया तो वह खुश हो गई।


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