मेरी आंटी मेरी जान – चौथा भाग

आंटी की आहत मुझे किचन मे सुनआडी,वो किचन मे थी. मैं किचन की तरफ चलने लगा. मुझे दिखते ही आंटी थोड़ा मुस्कुरा दी. मुझे उनकी मुस्कान अजीब सा लगा,और मुझे रहट मिला. मैने आंटी की तरफ ध्यान दिया. उनकी बिंदिया चमक रही थी. इसे से पहेले वी आंटी सुंदर दिखती थी लेकिन आज उनकी चहेरा मे चमक था. आंटी खाना बनाने मे बेस्टा थी.मैं कुछ बोलने के लिए हिम्मत कर रहा था पर आंटी पहेले बोली.‚बेटा आव वो हादसे के बड़े मे कवि बात नही करेंगे,जो होना था हो गयेा.‚ दोस्तो मेरा पूरा जोश किचन मे आंटी को दिखटेही उटर्गया था लंड की दर्द ने वी लंड को जान बेगार बना डियता और आंटी की चलती वी पहेलिएजेसी नही दिख रहिति वो अपनी नीचे हिस्से को नियंत्रित करके चल राई थी. परिस्ट्ीति को नज़रअंदाज करते हुवे मैं बस इतना ही बोला‚आप की ग़लती नही है‚ और मे निकल पड़ा खाने की वक्त आंटी ने इसे बात को दफ़ना दिया. वो सुबह मेरी जितनी खूबसूरात थी दिन उतना ही बेकार. मैं अपनी लंड को जल्द सही करना चाहता था. आव मुझको समझ मे आया अंकल की हालत कैसी थी. मुझे एक दिन वी लंड की वो हालत बर्दाश नही होरही थी. मैने गरम पानी से लंड को सॉफ किया और दरवाजा बंद किया और लंड सूखा रखने के लिया नंगा सोया. मुझे फिर काव नींद आई पता नही चला. अवीटक की अपना जीवन मे मैं इतनी गहेरी नींद मे नही था वो वी दिन पे. मुझे क्या पता, आगे क्या होने वाला है. मेरी जाव नींद खुली तो मुझे चारो तरफ आवाज़ सुनाई दी. बारिश घनघोर हो रही थी, बिजली गिरने की आवाज़ आराही थी और हवा तेज चलने से तरह तरह की आवाज़ सुनाई दी. मैं चौक गया मैं 5 घंटे से सो रहा था. मैने नीचे लंड दिखा पिसाव की वजह से लंड पूरा खड़ा था. लेकिन दर्द बहुत कम होगआई थी, दिल खुश हो गयेा. मैने तौलिया लपेट लिया और जल्दी मे बाथरूम चलगाया. जाव बाथरूम से निकला तो मैने फ्रेश महेसुस किया. मैने दरवाजे के कोने पर दो कप छाए दिखा. मुझे आंटी की याद आई अचानक आंटी मेरी आगे आगाई. आंटी की आँख च्चालक रही थी उनका छाती वी फुलराहा था. मुझे आंटी घुस्से पे है लगा. आंटी ने पूछा‚क्या कर रहा था जो मैने इतनी आवाज़ डेनएके बाद वी चुप रहा.‚ मैं चौक गया‚नही आंटी मैं सो रहा था.‚ आंटी‚नई बेटा तू कुछ चुपा रहा है, वो मैं जानती हू. बेटा मैं ने बहुत बड़ी ग़लती की है मुझे माफ़ कर लेकिन दूर होने की हरकत मत कर. तूने कवि दरवाजा लॉक नही की थी और नही कवि दिन मे इसे तरह गुमसूँ होता था‚ आंटी की बात से मुझे दिल पे हसी लगी थी. क्या बोलता ‘आंटी तेरी चुत ने मेरी लंड को कस कस के निचोड़ लिया इश्लीए मे कमजोड़ होके सो पड़ा, लंड की वी जान निकल पड़ी थी तो उसको हवा देना था और यह काम दरवाजा लॉक किए बिना केसा कराता.. मैं कुछ बोल नही रहा था बस सोच रहा था. फिर आंटी शुरु होगआई. ‘मैं आव एसा कुछ नही करूँगी, मुझे तेरी अंकल की कसम,मुझ से दूर नही होना.‚ आंटी की फिकर ने मुझे उत्साह दिया. मैने उन्हे पकड़ के अंदर किया और बाहोमे वार के बोला‚

आप की कसम आंटी आप से एक पल वी दूर नही हॉंगा.‚ मेरा लंड पूरा खड़ा था और हल्का दर्द शुरु हो रहा था. मैने आंटी की गाल चूमते उनकी कान मे बोला‚नही आप ने ग़लती नही की है और नही कोई ग़लत हुवी है. मैं आप को प्यार कराता हू ठीक उसी तरह जिस अंकल करते थे. आंटी कुछ बोल रही थी लेकिन मैने उनकी लिप्स पे किस डेडी. मेरा दवव उनको बिस्तर पर लेजा रहता.,मेरे तौलिया गिर गयी. जाव मैने उनकी सारी उपर करने की कोसिस की तो आंटी ने मेरी हाथ को रोक ली. मैने आंटी की गाल पे चूमते बोला‚आंटी हम ख़ुसी से रहेंगे,इज़्ज़त से रहेंगे साव सम्हलेंगे अंकल ने कहेजेसा‚आंटी ने मेरी आख मे दिख के बोली‚बेटा मैं खुद को केसे माफ़ करूँगी.!‚ मैने इषबर हाथ से उनकी सारी पूरा उथलिया और बोला ग़लती कहा हुई है मुझे नही लगता. आपने तो मुझे जन्नत दिलाया आंटी. मैं उसी तरह हू आंटी जिस तरह अंकल ने लेटर मे जिकिर की है. मैं तो दिन मे थकान से सोया था. पहेलिबर था ना आंटी. आंटी एक दम लाल होगआई. बेशरम वाली बात थी या सयद उनकी चुत मे वी आव मॅट चड़ चुकी थी. आंटी ने धीमी से कहा तो मेरा लाल पहेले से नालयक है.?‚ हा आंटी सिर्फ़ आप का आशिक़ हू. एसा बोलते ही मेरा बदन काप उठा और जाव मेरा लंड आंटी की चुत महेसुस किया तो मैने बिना निसना जोड़ का तीर मारा.जोड़का झड़का जोड़ से लगा. लंड चुत मे धक्का देके एसा रगदके फिसलगया की आंटी ने जोड़ से मुझे धक्का देदिया और अपनी कंमार को अलग करदी. आंटी की चीख निकल गयी थी. मुझे वी दर्द हुवा. मुझे लगा आव नही होगा. मैं आंटी से अलग हुवा. आंटी दर्द के मारे लाल होरही और शरम उल गायती और मूह से लंबी लंबी सास फेक के बोली ‘जग्गू बेटा मुझ से आव नही होगी. आज मुस्किल से चल पा रही थी. तूने तो मेरी बुरा हाल कर दिया एसा तो तेरा अंकल ने पहेली रात मे नही की ‘. आंटी की इषबात से मेरा लंड दर्द झेलते हुवे और सर खड़ा करने लगा. मैने आंटी की चुचि मे हाथ फेराते हुवे बोला ‘आंटी क्या मैने ज़्यादा खुश कर पाया था?‚ मेरे सवाल से आंटी की हसी निकली और बात को टालते बोली ‘माफ़ करना बेटा अगर मैं तेरा साथ अवी लगी तो खड़ा होके खाना बना नही पौँगी.‚ एसा बोलके आंटी अलग होने लगी. मेरे लंड मे दर्द नही होता तो सयद आंटी को मानकर केसे वी छोड़ता क्यू की लंड की भुख के आगे खाना क्या है. लेकिन आंटी की खुली हुई बात से मुझे आइडिया आया और मैने वी बिन कुछ थाने उनकी हाथ पकड़ के अपना लंड की तरफ लेगया और बोला‚आंटी मुझे वी दर्द है लेकिन दिल बहुत होरही है. आंटी नासमझ मे मुझे दिखने लगी. मैने आंटी की उलजान को समझते हुवे उनकी हाथ से लंड पक़अंकलिया. उनकी हाथ लगतेःी लंड तुम उठा.आंटी मेरी लंड को दिखटेही रहेगाई जेसे कोई नयी जिब देखी हो. मैने दो बार लंड उनकी हाथ से घिसके संकेत करते बोला‚यह तड़प रहा है आप के लिए, आंटी अपनी हाथ से कुछ प्यार दो.‚ आंटी ने आहे भराते बोली ‘मैने यह इतना मोटा और लंबा वी हो सकता है, कवि कल्पना वी नही की थी,यह केसा करसकता है जानलेवा है‚

मैने आंटी की हाथ को लंड पे दवव देते बोला‚इसको अपने झेल लिया था आंटी‚ . आंटी अपनी मूठ को लंड पे लगा के हिलने लगी. मैं बहुत उत्तेजित हो गयेा. मेरी लंड को दिख के आंटी को रहें आ रहा था,इसलिए प्यार से हिला रहिति. मुझे आंटी की चहेरा दिखने को दिल हुवा, मैं बोला‚आंटी मेरी तरफ देखोना‚. आंटी ने मुति मारना बंद करके मुझे दिखा. मैने आंटी की मूठ को पकड़के हिलना कायम रखने को संकेत किया.दोस्तो काश यह पल का मेरी पाश वीडियो या फोटो होता. मैं गॅरेंटी दे सकता हू अगर यह फोटो होता तो किसी हिचड़े को दिखा देता वी उसकी लंड खड़ा होती थी. मैं कोसिस कराता हू आपके लिए *एक औरात मूठ मर्देटी हुई,और मारद की तरफ दिखती हुई, गोरी और उजेला चहेरा है, माथे पे बिंदिया है,गले मे लटके हुवे मंगल सट्रा है,ब्लाउस सारी पहेनी हुई है. बाल खुली नीचे एक तरफ फैले हुवे.अरे दोस्त सारी पहेनी हुई औरात मूठ मर्देटी हुए आप कल्पना करसकते हो लेकिन यह बहुत कुछ था. अगर कोई योगी देखेगा तो ओह आसान से बोलता परम सुंदरम,परम सुखाम. वो औरात हिन्दुस्ठानी असली औरात दिखती है जो मेरी मूठ मार रही है और मेरी तो वो सब से बदकार है मेरी आंटी है. मेरा लंड दर्द को भूलकर आंटी की मूठ मे अपना जगा बड़ा रहता. दोस्तो आजतक मैने कवि ओरल सेक्स की कल्पना नही की थी. मुझे पता भी नही था वो समय तक लेकिन आंटी ने जाव अपने सूखे लाल लिप्स को ज़ुबान निकलके भीगने लगी तो मेरी उत्साह कमाल हो गयेा मुझे आंटी की लिप्स मे अपना लंड चूमने की कल्पना आगेया. मुझे रहा नही गया. मैने आंटी की बाल पकड़के अपनी और खिछा और दूसरी हाथ से आंटी की मुति के साथ लगाके मूठ तेज करने लगा. आव मैं आंटी को एक हाथ से उनकी सर की पीछे दवव देते हुए एसा किस कर रहता की मैने उनकी ज़ुबान वी चूस ली.मैं और जोश मे आया और मेरा लंड ने अपना पानी तेज़ी से निकलगया.मेरी अनुभवी आंटी को पता चलगया और वो मुस्कुरके चालदी,ज़रूर उसकी हाथ गाँधी होगआई होगी. आज लंड ने दो बार इतनी पानी चोदा था की मैं अंदर से खाली महेसुस कर रहा था. आंटी ने गरम पानी और आंटिसेपटिक मेरे लिए दिया और खुद खाना बनाने लग गई. आंटी मेरे लिए सहज हुई.आव मेरी आंटी मुझे सावकुछ लगने लगी. मैं बहुत खुश था.

आज आंटी के साथ सौंगा, उनको नंगा दिखूंगा. मैने अवीटक उनकी चुत और गांड दोनो नही दिखता. मुझे आंटी की चुचि मूह मे लेना वी था. और रात मे आंटी के साथ नयी जीवन की योजना तय करना वी था. हर चीज़ जो मेरे कल्पना थे आव मुझे पूरी होते जराही है लगे. जाव आप दूर सोचते है तो करीब क्या होनेवाला आप को पता वी नही होता. मैं अंदर था. आंटी की आवाज़ आई ‘बेटा देख तुमसे मिलने कोई आए है! ‘ कौन आंटी?‚ मैने पूछा. ‘वोही तेरे आंटी से वी प्यारी‚ ‘हे भगवान! आव मुझे बतने की कोई ज़रूरी नही थी वो सुजाता मौसी मेरी आंटी की सग़ी बेहन है, वोही होगी. आंटी बोलती थी मैं बचपन मे सुजाता मौसी को बहुत चाहता था,अपनी आंटी से वी ज़्यादा इसलिए जमाने मे अंकल मज़ाक वी करते थे की मौसी के साथ, सुजाता अपनी दीदी के बचे के लिए वी उनसे सदी करे. सुजाता मौसी बहुत प्यारी थी. बचपन के दुनियामे किस तरह पर्बेश होना है उनको अच्छी तरह मालूम है. उनकी आगे मैं खुद को अवी वी बचा महेसुस कराता हू.कारव एक साल के बाद अचानक आज आईति. मैने उनको दर्शन किया लेकिन उन्होने मुझे चरण चोना ज़रूरी था बोलके मज़ाक की. मैने इतना बारिश मे आनेकी वजह पूछा तो क्या ग़लती हुई क्या बेटा पूचेटाछ शुरु किया बोलके हास दी,उनको मैं अवी वी बचा सूझता हू. आंटी चाय बनाने के लिए जराही थी मौसी ने उनको रुक के आज जग्गू की हाथ की चाय पीनी है बोली. आंटी ने मुस्कुराते कही‚चलो बेटा तुम्हारी मौसी को चाय पिलाओ. तुम बस पानी गरम करना चीनी और छाए डालने के लिए मौसी को बोलना,‚ साव हासे फिर वी मैने कोसिस की. जाव वी मौसी मुझको घुस्स दिलाती वो खुद बहुत ख़ुसी होती एसा लगता था जेसे की मैं घुस्सा मे प्यारा लगता हू. सुजाता मौसी का वी सदी हो चुका था. उनका एक बेटा रोहन और बेटी रीमा है. वो दोनो स्कूल पड़ते है. उनका पाती बाहर मुलुक मे है. सुजाता मौसी को मैं आंटी की तरह प्यार कराता हू.

मैने बचपन उनके साथ ज़्यादा गुज़रा है. सुजाता मौसी मेरे बहुत ख्याल कराती थी. इसलिए सुजाता मौसी मेरे लिए एक दोस्त से लेकर आंटी समान थी. असल मे सुजाता मौसी का आनेकी ख़ुसी बहुत होती थी परंतु आज मुझे सुजाता मौसी की आनएसए बहुत नीरस हुई थी. आप जांसकते थे की मैं क्या सोच रहता और क्या होरहता. हम ने साथ चाय पीलिया. सुजाता मौसी को वी साख हुवा की मैं परिसनी मे हू लेकिन मैने सर दर्द की बहाना रचा. खाना खाने के बाद हम सोगआय बारिश चालू था लेकिन मेरे सिने पर आग जल रहा था. दिन वार सो लिया था और रात वार आंटी की साथ होने की चाहत से वो रात मेरे लिए बहुत मुस्किल की रात रहा.मैं सुबह नींद मे था. आंटी की पायल की झाँक सुंतेही मेरा दिल ख़ुसी से झूम उठा. आज वी सोणेका नाटक किया और आंटी की चूमि का इंतेज़ार किया. आंटी ने छाए टेबल पे न्यू एअर और मेरे को चूमने के लिए सर नीचे की. मैने मौके का फ़ायदा उठाते हुवे उनकी सर को पकड़के चूमना शुरु किया. मैने आंटी को बिस्तर खिचके बाहोमे वारने की कोसिस की तो आंटी ने मुझे रोक के बोली ‘जग्गू हम अकेले नही है, सुजाता देखेगी तो!‚ मैने आंटी की लिप्स एक बार चूमा और बोला ‘नई आंटी हम आंटी बेटे चूम तो सकते है ना!‚ आंटी मुस्कुराती बोली ‘हा लेकिन इष्तरह नई, याद करो अंकल ने क्या कहा घर की इज़्ज़त!‚ मैं ने सर नीचे करते बोला ‘आंटी, मौसी को आज रिटर्न भेज दोनो.‚ मेरी बचो जेसा बाते सुनके आंटी की हसी निकली और जाते जाते बोली ‘वो कम से कम 1 महीने के लिए रहेगी.‚ मैं हैरानी से बेड पे लिटा. मैं इतना घुस्सा मे था की मेरा अंतर्मन मौसी को गली दे रहा था..‚रॅंड कही की घर मे मौसा की लंड होती तो यह बारिश मे डिंवर अपनी मरवके उदार रहेटिति आव इडार किसके साथ गांड मरवाने के लिए आई है‚ पहेली बार इतनी घुस्स से गाँधी सोच आरहेते सयद मैं वासना के कारण पागल हो रहा था. गरम छाए से मूड को ट्यूनिंग कर रहा था आंटी वी छाए पीते पीते आगाई. मैं आंटी को दिख के मुस्कुराया. हम ने कुछ गड़बड़ नही की. मौसी के बचे हॉस्टिल पर रहेनेसए मौसी फारीक़ होगआती. आंटी की आखो मे वी मुझसे लिपतने की चाहत दिख रहा था. लेकिन हुमको कुछ सूझ नही रहा था. हम मौसी को ख़ुसी और इज़्ज़त के साथ रखना चाहते थे. दो चार दिन तक मैने खुद को रोक लियता. उसकी बाद मुझे मुस्किल हो रहता. मेरा लंड वी पूरी तरह ठीक हो चुका था. मैं मौका ढुद रहा था. मैं आंटी की आश्पस घूम रहा था जेसे गर्मी महएने मे सांड गाए की पीछे घूमता है. मैने ध्यान दे रखा था. मौसी खाना बनाते आंटी की साथ होती थी लेकिन बर्तन बनाने की वक्त साथ मे नही होती. यह समय मौसी टीवी मे उनकी मन पसंद सयद कुमकुम सीरियल दिखने को जाती थी. मैने यह अवसर को आजमाना चाहा. चौथी दिन मे मैं मौसी टीवी रूम मे घुसते ही किचन चलगाया. आंटी बर्तन साफ कर रही थी. मैने आंटी को पीछेसे बाहोमे लिया. आंटी ने मुझे दिखा और बोली ‘जग्गू तुझे मालूम है ना तेरी मौसी वी है.‚ मैने उनकी कान चूमते बोला‚हा आंटी कुमकुम दिख रही है‚ आंटी थोड़ी शांत हुई. मैने पीछेसे उनकी सारी सरकाके उनको झुकने को कहा. आंटी समझ रही थी. उन्होने पेंटी पहन राखीति, मैं झीजक के बोला‚आंटी इसको क्यू पहेनटी हो‚ आंटी शरमाती बोली ‘तुझे तो नंगी चलिंगू तो वी चलेगा‚ मैने पेंटी नीचे कर दिया और आंटी की गांड को थोड़ा खिचके लंड को आगे किया तो मुझे चुत की महेसुस हुई.दोस्तो हमे भी पता दीजिए कहानी केसे जा रही है…


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