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पैर दबाते दबाते लंड दबा दिया

Pair dabate dabate lund daba diya:

Kamukta, hindi sex story मेरे पापा डॉक्टर हैं घर में मैं एकलौता हूं मेरी मम्मी भी डॉक्टर हैं लेकिन ना जाने मेरा पढ़ाई में कभी मन नहीं लगा इसलिए मैं कभी अच्छे से पढ़ ही नहीं पाया मेरा नेचर बहुत ही शर्मीले किस्म का है मैं बहुत ज्यादा शर्माता हूं और मैं ज्यादा किसी से बात भी नहीं करता इसी के चलते मेरे स्कूल में भी बहुत कम दोस्त थे। उसके बाद जब मैंने कॉलेज में पढ़ाई की तो वहां पर मेरे कुछ चुनिंदा दोस्त थे जिनसे कि मैं बात किया करता था मेरा नेचर ना जाने क्यों था। मेरे पिताजी ने मुझे एक अच्छे स्कूल में पढ़ाया मेरे लिए सब कुछ किया लेकिन मेरे शर्माने की वजह से मुझे कई बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा क्योंकि मैं बहुत ज्यादा शर्म आता था मैं किसी से अपनी नजरें मिलाने की हिम्मत नहीं कर पाता।

मेरे मम्मी पापा ने मुझे कभी किसी चीज की कोई कमी नहीं होने दी उन्होंने मेरा बहुत ध्यान दिया हमारा छोटा सा परिवार है। मेरे माता-पिता मेरे बारे में बहुत सोचते हैं और हमेशा कहते हैं कि बेटा तुम अपने आप के अंदर थोड़ा सा बदलाव लाओ लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि मेरे अंदर कैसे बदलाव आएगा मैं बहुत सीधा हूं जिस वजह से कई बार लोग मेरा फायदा भी उठा लेते हैं। एक दिन मैं घर पर था मेरी मम्मी मुझे कहने लगी बेटा तुम बाहर से सामान ले आओ मैं तुम्हें लिस्ट दे देती हूं। मैं जब सामान लेने गया तो उस दुकानदार ने मुझे काफी महंगा सामान लगा दिया मुझे तो कुछ भी अंदाजा नहीं था मैं उसे पैसे देने ही वाला था तभी ना जाने कहां से एक लड़की आई और वह कहने लगी क्या तुम्हारे पास पैसे ऐसे ही पड़े हैं। मैं उसकी बातों को नहीं समझा वह मेरे चेहरे की तरफ देखने लगी और कहने लगी मैं तुम्हीं से बात कर रही हूं मैंने उसे कहा हां मैडम कहिए वह कहने लगी मैं मैडम नहीं हूं मेरा नाम मनीषा है। मैंने उसे कहा लेकिन हुआ क्या है उसने मुझे कहा तुम मुझे अपना बिल दिखाना जब मैंने उसे सामान का बिल दिखाया तो उसमें दुकानदार ने काफी ज्यादा पैसे लगाए हुए थे लेकिन ना जाने उसने कहां से यह सब देख लिया था।

उसने उस दुकानदार से कहा की बेवजह किसी को ऐसे लूटते हैं यह बिल्कुल भी जायज नहीं है उसकी इस बात से वह दुकानदार बहुत ज्यादा घबरा गया और हाथ जोड़ने लगा लेकिन मनीषा तो जैसे उसे माफ करने को तैयार ही नहीं थी। उसने कहा आज के बाद कभी ऐसी गलती नहीं होगी लेकिन मनीषा ने उसे बिल्कुल भी नहीं छोड़ा वहां पर काफी लोग जमा हो गए। मैंने मनीषा से कहा मुझे घर जाना है मेरी मम्मी मेरा इंतजार कर रही होगी मुझे यह सामान घर पर देना है और फिर उन्हें अपने हॉस्पिटल जाना है उन्हें लेट हो रही है। मैंने उससे कहा अब तुम यह सब छोड़ो मैं तुम्हें बाद में मिलूंगा मैं वहां से चला गया लेकिन ना जाने उसके बाद उस दुकानदार का मनीषा ने क्या किया होगा मैं यही सोचता रहा उसके बाद मैं दोबारा उस दुकान में कभी नहीं गया। मुझे नहीं मालूम था कि मनीषा से मेरी मुलाकात कुछ ही दिनों बाद हो जाएगी उस दिन मैं अपनी मम्मी के साथ था। मनीषा मुझे मिली तो वह मुझे कहने लगी उस दिन तो तुम दुकान से चले गए थे लेकिन तुम्हें वहां रुकना चाहिए था मैंने मनीषा को अपनी मम्मी से मिलाया मेरी मम्मी मनीषा की तरफ देखे जा रही थी मनीषा तो चुप होने का नाम ही नहीं ले रही थी। जब मेरी मम्मी ने उसे कहा बेटा उस दी तुमने बहुत अच्छा किया रोहन तो बहुत ही सीधा है और ना जाने लोग उसे कैसे बेवकूफ बना देते हैं। मनीषा कहने लगी आंटी मैं बिल्कुल यही कह रही थी उस दिन वह दुकानदार तो रोहन से कुछ ज्यादा ही पैसे ले रहा था अच्छा हुआ मैं उस वक्त वहां थी नहीं तो वह उससे ज्यादा पैसे ले लेता। मेरी मम्मी ने मनीषा से कहा चलो हम तुम्हें छोड़ देते हैं मनीषा हमारे साथ कार में ही आ गई और वह मेरी मम्मी से बात करने लगी मेरी मम्मी ने पूछा बेटा तुम क्या करते हो मनीषा ने कहा मैंने कुछ समय पहले अपना एम.बी.ए किया है और अब मैं जॉब की तलाश में हूं। मेरी मम्मी ने कहा अच्छा तो तुम जॉब देख रही हो मम्मी ने कहा मैं तुम्हारी अपने फ्रेंड के उनके ऑफिस में बात करती हूं वह कहने लगी हां यदि आप वहां बात करें तो अच्छा रहेगा।

मेरी मम्मी और उसके बीच काफी बातें हो रही थी मैं गाड़ी चला रहा था लेकिन मैं जब भी पीछे देखता तो मनीषा मेरी तरफ देख रही थी हम लोगों ने मनीषा को उसके घर पर छोड़ दिया और वहां से हम लोग चले आए। मेरी मम्मी ने कहा मनीषा कितनी अच्छी लड़की है और क्या वाकई में उस दिन ऐसा हुआ था। मैंने मम्मी से कहा मम्मी उस दुकानदार ने मुझसे कुछ ज्यादा ही पैसे ले लिए थे लेकिन मनीषा पता नहीं कहां से आई और मनीषा ने उसे बहुत सुनाया उसके बाद वह दुकानदार चुप हो गया और मेरे सामने हाथ जोड़ने लगा। मैंने मम्मी से जब यह बात कही तो मम्मी कहने लगी मनीषा बहुत अच्छी लड़की है वह मुझे बहुत अच्छी लगी। मेरी मम्मी को ना जाने मनीषा में ऐसा क्या दिखा कि मेरी मम्मी तो उसकी तारीफ ही करने लगी लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि वह हमारी शादी करवाने वाली है। मुझे जब इस बात का पता चला तो मैंने अपनी मम्मी से कहा मम्मी आपके दिमाग में क्या मनीषा के साथ मेरा रिश्ता करवाने की बात चल रही है। मेरी मम्मी ने कहा हां बेटा मनीषा तुम्हारे लिए बिल्कुल सही है क्योंकि वह बहुत ज्यादा एक्टिव है और कम से कम तुम्हें उससे कुछ सीखने को तो मिलेगा मुझे बहुत बुरा सा महसूस हुआ और मैं अपने कमरे में चला गया। मेरी मम्मी मेरे पास आई और कहने लगी बेटा इसमें बुरा मानने वाली कोई बात नहीं है मनीषा जैसी लड़की तुम्हारी जिंदगी में आएगी तो तुम्हारी जिंदगी संवर जाएगी उसके जैसी लड़की आजकल मिल पाना बहुत मुश्किल है।

मेरी मम्मी को मनीषा ना जाने क्यों इतनी अच्छी लगी मेरी मम्मी ने उसके पापा मम्मी से भी बात कर ली लेकिन मैं मनीषा से शादी करना नहीं चाहता था क्योंकि मैं उसे ना तो अच्छे से जानता था और ना ही वह मेरे बारे में कुछ जानती थी परंतु मैं अपने मम्मी पापा की बात को मना ना कर सका। मनीषा से मेरी सगाई हो गई मनीषा की जब मुझसे सगाई हुई तो हर समय वह मेरे साथ ही रहती मैंने मनीषा से कहा तुम जॉब क्यों नहीं कर लेती हो लेकिन उसे तो सिर्फ मेरे साथ ही रहना था और वह मेरे साथ ही रहती। हम लोग ज्यादातर समय साथ में बिताते लेकिन अभी मुझे कुछ ऐसा नहीं लगा था जिससे कि मनीषा और मेरे बीच में दोस्ती हो पाये या वह मुझे समझ पाती धीरे धीरे हम दोनों का रिश्ता आगे बढ़ता जा रहा था। हम दोनों की शादी का समय भी नजदीक आ रहा था मेरे दिमाग में तो सिर्फ एक ही बात चल रही थी कि क्या मैं मनीषा के साथ खुश रह पाऊंगा लेकिन मेरे माता-पिता के आगे मैं शायद कुछ बोल ही नहीं सकता था। मेरे मम्मी पापा ने ही मेरे लिए इतना सब कुछ किया है इसीलिए मुझे मनीषा से किसी भी हाल में अब शादी करनी हीं थी हम दोनों की शादी का दिन जब नजदीक आने वाला था तो मनीषा मुझसे पूछने लगी तुमने क्या शॉपिंग की है। मैंने उसे कहा मैंने तो अभी कुछ भी नहीं लिया है लेकिन वह मुझे जबरदस्ती अपने साथ ले गई और कहने लगी हम दोनों साथ में ही शॉपिंग कर लेते हैं हम दोनों ने साथ में शॉपिंग की और उस दिन हम लोगों को सुबह से शाम हो गई थी लेकिन मनीषा की शॉपिंग खत्म ही नहीं हो रही थी।

मैंने उससे कहा मैं तो थक चुका हूं अब मुझे घर जाना है हम लोग कल आ जाएंगे मनीषा मेरी बात मान गई और हम लोग वहां से मेरे घर चले आए। मैं बहुत ज्यादा थक चुका था इसलिए मैं अपने रूम में जाकर लेट गया। मनीषा मुझे कहने लगी तुम तो इतना जल्दी थक गए मैंने मनीषा से कहा मैं थका नहीं हूं लेकिन मेरे शरीर बुरी तरीके से टूट रहा है और बहुत दर्द हो रहा है क्योंकि मुझे इतनी पैदल चलने की आदत नहीं थी। उस दिन ना जाने मेरे पैरों में क्यों इतना दर्द हो रहा था मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था। मनीषा कहने लगी मै तुम्हारे पैर दबा देती हूं मैंने उसे कहा नहीं तुम रहने दो लेकिन उसके बावजूद भी उसने मेरे पैर दबाने शुरू कर दिए। जब वह मेरे पैरों को दबाती तो मुझे थोड़ा राहत मिली जैसे ही उसका हाथ मेरे लंड पर पडा तो मेरे अंदर एक हल्की बेचैनी सी जाग गई। वह भी समझ चुकी थी मेरा लंड खड़ा होने लगा मैं अपने आप पर बिल्कुल भी काबू ना कर पाया जैसे ही उसने मेरे लंड को दबाना शुरू किया तो वह भी अपने आपको ना रोक सकी। उसने मेरे लंड को बाहर निकाला और अपने हाथो में ले लिया जब वह मेरे लंड को हिलाने लगी तो कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत ज्यादा मोटा है।

मैंने उसे कहा क्या हम लोग शादी के बाद यह सब नहीं कर सकते लेकिन हम दोनों के अंदर जवानी का जोश जाग चुका था हम दोनो ही अपने आप पर बिल्कुल भी काबू ना कर सके। मैंने मनीषा के कपड़ों को उतारा तो वह मेरे सामने नंगी थी। मैंने उसके रसीले होठों का रसपान किया, कुछ देर तक मैं उसके गोरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसता रहा उसके स्तनों को जब मैं चूसता तो उसके अंदर एक अलग ही उत्तेजना पैदा हो जाती। मैंने जब अपने लंड को मनीषा की योनि पर रगडना शुरू किया तो उसकी योनि से गिला पदार्थ बाहर की तरफ को निकलने लगा मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी योनि के अंदर प्रवेश करवाया तो वह चिल्ला उठी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है लेकिन मुझे तो मजा आने लगा था। मैं उसे तेज गति से धक्के देने लगा मेरे धक्के इतने तेज होते की मैंने कभी सोचा ना था कि मैं इतनी जल्दी मनीषा की चूत के मजे ले पाऊंगा लेकिन यह मेरी जिंदगी का पहला सेक्स था इसलिए मेरे लंड में बहुत ज्यादा दर्द होने लगा। मनीषा की योनि से भी खून का बहाव तेज होने लगा उसकी योनि से गर्मी निकलने लगी जिसे कि मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त ना कर सका और मेरा वीर्य पतन मनीषा की योनि में हो गया। कुछ समय बाद हम दोनों की शादी हो गई और हम दोनों पति पत्नी के रूप में अपना जीवन यापन कर रहे हैं।


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