पुराने आशिक का प्यार

Purane ashiq ka pyar:

hindi sex story, antarvasna मेरी शादी का समय बहुत नजदीक आने वाला था लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ रोहित का ही चेहरा आ रहा था मैं इस शादी से बिल्कुल भी खुश नहीं थी क्योंकि मैं कभी भी यह शादी नहीं करना चाहती थी लेकिन मेरे घरवालों की वजह से मुझे विशाल के साथ शादी करनी पड़ी, मेरे दिल और दिमाग में सिर्फ रोहित ही बसा था रोहित के साथ मेरा पिछले पांच वर्षों से रिलेशन था हम दोनों एक दूसरे से कॉलेज में ही मिले थे और कॉलेज के पहले दिन से ही मेरी रोहित से दोस्ती होने लगी, रोहित और मेरे बीच बहुत नजदीकियां बढ़ गई जिसकी वजह से हम दोनों रिलेशन में आ गए लेकिन मेरे पिताजी को बिल्कुल भी मंजूर नहीं था कि मेरी शादी रोहित से हो क्योंकि रोहित एक मध्यमवर्गीय परिवार से है और मेरे पिताजी एक बड़े साहूकार हैं इसलिए उन्होंने मेरी शादी विशाल से करने की सोची।

जब उन्होंने मेरी शादी विशाल से करने की बात कही तो मैं बिल्कुल भी खुश नहीं थी विशाल को भी मैं काफी पहले से जानती हूं क्योंकि उसके पिताजी और मेरे पिताजी दोस्त हैं इसलिए विशाल का परिवार हमारे घर पर अक्सर आता रहता है लेकिन मैंने कभी भी विशाल को पसंद नही किया क्योंकि वह बड़ा ही घमंडी किस्म का लड़का है और उसके बात करने का तरीका भी बिल्कुल ठीक नहीं था लेकिन अब मेरी शादी विशाल से होने वाली थी तो मेरे पास कोई भी रास्ता नहीं था। रोहित मुझे कहने लगा कि क्या तुम यह शादी कर के खुश रहोगी, मैंने अमित से कहा लेकिन मैं अपने घर वालों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठा सकती, रोहित कहने लगा मैं भी नहीं चाहता कि तुम अपने घर वालों के खिलाफ कोई कदम उठाओ लेकिन तुम मेरा साथ तो दे ही सकती हो परंतु मेरे अंदर बिल्कुल भी हिम्मत नहीं हुई कि मैं रोहित का साथ दे सकूं इसलिए रोहित और मैंने अपने रास्ते अलग कर लिए, हम दोनों के रास्ते अब अलग थे। मेरी विशाल से सगाई हो चुकी थी मैंने विशाल से सगाई सिर्फ एक शर्त पर की थी कि वह अपने आप को जब तक नहीं बदलेगा तब तक मैं उससे शादी नहीं करूंगी।

विशाल ने अपने अंदर बहुत ज्यादा परिवर्तन किया विशाल मुझसे प्यार भी करने लगा मुझे भी लगा कि चलो अब विशाल बदल चुका है तो मुझे उससे शादी कर लेनी चाहिए इसलिए मैंने शादी के लिए हां कह दी, यह सब मेरी रजामंदी की वजह से ही हो रहा था लेकिन मेरे दिमाग में उस वक्त भी रोहित का ही खयाल था मैं अपनी सहेलियों से हमेशा रोहित के बारे में पूछती और उसके बारे में जब भी मुझे मेरी सहेलियां बताती तो मेरे चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान आ जाती, रोहित का नाम सुनते ही मैं खुश हो जाती लेकिन मुझे नहीं पता था कि रोहित शहर छोड़ कर मुंबई चला जाएगा मुझे इस बात का बहुत दुख हुआ। मेरी शादी जयपुर में ही विशाल के साथ हो गई मैं और विशाल बहुत खुश थे धीरे-धीरे विशाल भी मुझे समझने लगा मैंने विशाल को कभी भी रोहित के बारे में नहीं बताया क्योंकि मुझे लगा यदि मैं विशाल को कभी रोहित के बारे में बताऊंगी तो कहीं उसे बुरा ना लगे इसलिए मैंने उसे यह सब बात नहीं बताई और ना ही शादी के बाद मैंने कभी रोहित से बात की। एक दिन विशाल मुझे कहने लगा मैंने दिल्ली में सेटल होने की सोची है, मैंने विशाल से कहा लेकिन हम लोग जयपुर में भी तो रह सकते हैं लेकिन विशाल कहने लगा मुझे दिल्ली में अपना बिजनेस सेट अप करना है इसलिए उसके लिए मुझे अब दिल्ली ही रहना पड़ेगा और तुम्हें भी मेरे साथ चलना होगा, विशाल घर में एकलौता है। मैंने विशाल से कहा लेकिन मम्मी पापा अकेले हो जाएंगे, वह कहने लगा मैंने मम्मी पापा से पहले ही बात कर ली थी और मम्मी पापा को भी कोई दिक्कत नहीं है उन्होंने ही मुझे दिल्ली जाने की इजाजत दी है, मैंने विशाल से कहा मैं एक बार मम्मी पापा से बात कर लेती हूं, विशाल मुझे कहने लगे रजनी तुम भी मुझ पर कभी भरोसा करती ही नहीं हो, मैंने विशाल से कहा लेकिन फिर भी मैं मम्मी पापा से एक बार बात कर ही लेती हूं। मैंने मम्मी पापा से इस बारे में बात की तो वह कहने लगे हम लोगों ने ही विशाल को दिल्ली जाने के लिए कहा है, मैंने जब विशाल से कहा कि चलो मैं अब तुम्हारे साथ दिल्ली आने के लिए तैयार हूं तो हम दोनो ने दिल्ली में जाने का निर्णय ले लिया वहां पर विशाल के चाचा जी रहते हैं जिन्होंने हमारे लिए रहने की सारी व्यवस्था करवा दी थी विशाल के चाचा जी का दिल्ली में बहुत बड़ा कारोबार है।

हम लोग दिल्ली में सेटल हो गए और दिल्ली में ही विशाल ने अपना काम शुरू कर दिया, विशाल मुझे किसी भी चीज की कमी नहीं होने देते लेकिन मुझे बहुत अकेला सा महसूस होता मुझे अपने दोस्तों से बात करने का मन होता लेकिन मैं अपने दोस्तों से बात भी नहीं कर पाती थी क्योंकि कुछ लोगों के तो मेरे पास नंबर ही नहीं थे और जिन लोगों के मेरे पास नंबर थे उनसे भी मेरी बात नहीं हो पाती थी क्योंकि सब लोग अपने लाइफ में बिजी हो चुके थे। एक दिन मैं अपनी मम्मी से फोन पर बात कर रही थी मेरे फोन पर किसी अननोन नंबर से कॉल आ रहा था मैंने उस वक्त तो फोन नहीं उठाया लेकिन जब मैंने उस नंबर पर कॉल बैक की तो सामने से रोहित ने हेलो कहा, मैं रोहित की आवाज पहचान गई रोहित मुझे कहने लगा तुम तो अपनी लाइफ में बिजी हो चुकी हो, मैंने रोहित से कहा अब तो तुम भी अपनी लाइफ में बिजी हो चुके होंगे, रोहित कहने लगा मैंने भी शादी कर ली है, मैंने रोहित से कहा चलो तुमने यह तो अच्छा किया कि तुमने भी शादी कर ली। रोहित और मैंने उस दिन काफी देर तक बात की रोहित को मैंने यह बता दिया था कि मैं दिल्ली में रहने लगी हूं रोहित ने मुझे कहा कि मेरा भी दिल्ली में अक्सर आना-जाना होता रहता है, मैंने रोहित से कहा तुम जब भी दिल्ली आओ तो मुझे जरूर मिलना।

रोहित के साथ मेरी सिर्फ इतनी ही बात हो पाई, मेरे जीवन में सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन जब जीवन में सब कुछ अच्छा चलता है तो उसी वक्त कोई ना कोई मुसीबत आ ही जाती है मेरे पति की तबीयत एक दिन अचानक से खराब हो गई जब विशाल की तबीयत खराब हो गई तो वह ना तो कुछ अच्छे से बात कर पा रहे थे और ना ही वह कुछ काम कर पाते मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था, मैंने पहले सोचा कि यह सब मैं अपने सास-ससुर को बता दूँ लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हुई इसलिए मैंने उन्हें नहीं बताया। विशाल की तबीयत भी अब धीरे धीरे ठीक होने लगी थी विशाल अब थोड़ा बहुत बात करने लगे थे लेकिन उन्हें चलने में परेशानी होती, विशाल से मैंने एक दिन कहा की विशाल क्या मैं इस बारे में मम्मी पापा से बात कर लूं, वह कहने लगे कि नहीं तुम यह बात किसी को भी मत बताना इसलिए मैंने भी मम्मी पापा से इस बारे में कोई बात नहीं की लेकिन मुझे बहुत डर था कि कहीं कोई बड़ी अनहोनी ना हो जाए मैं हर रात यही सोचती कि कहीं कुछ बड़ी परेशानी ना हो जाए। एक दिन मुझे रोहित का फोन आया और उस दिन रोहित के साथ मैंने काफी देर तक बात की, मैंने अपने पति विशाल के बारे में रोहित को बताया वह कहने लगा तुमने विशाल को किसी डॉक्टर को दिखाया, मैंने कहा हां उनका इलाज एक अच्छे डॉक्टर से चल रहा है उनकी तबीयत में अब पहले से सुधार है परंतु उन्हें चलने में तकलीफ होती है। रोहित मुझे कहने लगा मैं 2 दिन बाद दिल्ली आ रहा हूं वहां पर मुझे कुछ काम है मैंने उससे कहा तुम मेरे घर पर ही आ जाना। दो दिन बाद रोहित घर पर आ गया मैंने रोहित को अपने पति से मिलवाया रोहित और विशाल ने काफी देर तक बात की वह दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे मैंने विशाल से कहा तुम अब आराम कर लो। विशाल को मैंने दवाई दे दी विशाल को बहुत गहरी नींद आ गई रोहित और मैं दूसरे रूम में आकर बैठ गए।

हम दोनों आपस में बातें करने लगे मैंने रोहित को जब अपनी परेशानी बताई तो रोहित कहने लगा मैंने तो तुमसे सिर्फ दूर जाने के बारे में सोचा था लेकिन अब भी मेरे दिल में तुम्हारा ही खयाल है। मैंने रोहित से कहा मैं विशाल के साथ खुश हूं लेकिन जब से विशाल की तबीयत खराब हुई है तब से मुझे बड़ा ही अजीब महसूस होता है। रोहित ने मेरा हाथ पकड़ लिया हम दोनों को अपने पुराने दिन याद आ गए रोहित ने जब मेरे होठों को किस किया तो मुझे ऐसा लगा जैसे काफी दिनों बाद किसी ने मेरे होठों को छुआ है। रोहित के होंठ जैसे ही मेरे होठो से टकराए तो हम दोनों के अंदर गर्मी पैदा होने लगी। मैंने अपने आपको रोहित के सामने समर्पित कर दिया था रोहित ने मेरे होठों का बड़े ही अच्छे चूसा, मैंने उसके सामने अपने सारे कपड़े उतार दिए। जब मैंने रोहित के सामने अपने कपड़े उतारे तो वह मुझे देखकर कहने लगा तुम आज भी पहले जैसी हो।

रोहित मेरे स्तनों को चूसने लगा वह मेरे स्तनों को बड़े ही अच्छे से चूसता क्योंकि पहले भी हम दोनों के बीच अक्सर सेक्स होता रहता था। काफी समय बाद रोहित के साथ मेरे रिलेशन बन रहे थे उसने जैसे ही मेरी चूत को चूसना शुरू किया तो मेरे अंदर गर्मी बढ़ने लगी। रोहित ने जब अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डाल दिया तो मुझे बहुत मजा आने लगा मैंने अपने दोनों पैरों को खोलते हुए रोहित से कहा तुम्हारे अंदर अब भी उतना ही जोश है। रोहित मुझे तेजी से धक्के दिए जाता काफी समय से मैंने किसी के साथ सेक्स नहीं किया था तो मेरे अंदर भी बहुत दिनों से सेक्स को लेकर इच्छा थी रोहित ने उस दिन मेरी इच्छा बड़ी अच्छे से पूरी कर दी जैसे ही रोहित ने अपने वीर्य को मेरे ऊपर गिराया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए और आपस में बात करने लगे कुछ समय बाद विशाल ने मुझे आवाज दी। में दूसरे रूम में गई तो विशाल मुझे कहने लगे मेरी आंख लग चुकी थी। मैंने विशाल से कहा इसीलिए हम दोनों दूसरे रूम में बैठे हुए थे रोहित मुझे कहने लगा रजनी अभी मैं चलता हूं दोबारा तुमसे मुलाकात करता हूं वह यह कह कर चला गया।


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