प्यासी नजरों को मेरा इंतजार

Pyasi nazron ko mera intjar:

मैं एक इंजीनियर हूं मैं सरकारी विभाग में काम करता हूं और मैं अपने काम के प्रति बहुत ही ईमानदार हूं, एक दिन मैं अपने ऑफिस से घर लौट रहा था तो भाभी उस दिन कहती हैं कि भैया आज मुझे आपसे काम था मैंने भाभी से कहा हां कहिए क्या काम था भाभी कहने लगे कल छोटू का जन्मदिन है तो आपको मेरी मदद करनी पड़ेगी मैंने भाभी से कहा ठीक है भाभी मैं आपकी मदद कर देता हूं। वह मुझे कहने लगे कि तुम्हारे भाई साहब तो आज बिजी हैं और उनके पास समय नहीं है तो आप क्या मेरे साथ चल सकते हैं छोटू के लिए कुछ सामान भी लेना है और उसे कुछ गिफ्ट भी देना है, मैंने भाभी से कहा क्यों नहीं मैं आपके साथ चल लेता हूं। मैं अपनी भाभी के साथ सामान लेने के लिए चला गया उन्होंने बर्थडे का सारा सामान ले लिया और केक भी ऑर्डर करवा दिया, उन्होंने छोटू के लिए गिफ्ट ले लिया था।

मेरे भैया और भाभी की शादी को 7 वर्ष हो चुके हैं और उनका एक लड़का है उसी का नाम छोटू है उसे घर में सब लोग बहुत प्यार करते हैं मेरे माता-पिता तो छोटू से इतना प्यार करते हैं कि वह उसके बिना रह ही नहीं सकते, भाभी मुझे कहने लगी भैया आप अब घर चलिए मैंने सारा सामान ले लिया है मैंने और भाभी ने सारा सामान ले लिया था मैंने उनसे पूछा आपने सारा सामान ले तो लिया है ना कहीं कोई सामान छूट तो नहीं गया है, वह मुझे कहने लगी यदि कोई सामान रह गया होगा तो मैं आपको कह दूंगी और आप मेरे साथ चल लेना मैंने उन्हें कहा वैसे भी हमारे छोटू का जन्मदिन जो है। मैंने भाभी से पूछा आप किस किस को घर में बुला रहे हैं तो वह कहने लगे मम्मी पापा लोग शायद कल आएंगे और मैंने अपनी ममेरी बहन को भी बुलाया है। मैं भाभी की ममेरी बहन से कभी मिला नहीं था क्योंकि वह भाभी की शादी में आ नहीं पाई थी और वैसे तो मैं भाभी के परिवार में सब लोगों को ही अच्छे से जानता हूं लेकिन मैं उसे कभी मिला नहीं था। भाभी मुझे कहने लगे कि जब आप नीलम से मिलेंगे तो आपको उससे मिलकर बहुत अच्छा लगेगा मैंने कहा ठीक है वह तो कल ही मुलाकात हो जाएगी अगले दिन ऑफिस जाने से पहले मैंने भाभी से पूछ लिया भाभी आपको कोई चीज की जरूरत तो नहीं है, मैं ऑफिस से जल्दी आ जाऊंगा वह कहने लगे नहीं भैया अब मुझे कुछ जरूरत नहीं है।

मैं अपना ऑफिस चला गया और जब शाम को मैं घर लौटा तो घर पर काफी भीड़ थी मम्मी ने खुद ही अपने हाथों से खाना बनाया था मैंने उन्हें कह दिया था कि हम लोग हलवाई बुला लेते हैं लेकिन वह कहने लगी कि नहीं मैं खुद ही बना लूंगी वैसे भी मुझे खाना बनाना अच्छा लगता है और उन्होंने उस दिन खुद ही घर पर खाना बनाया। मैं जब उनकी बहन नीलम से मिला तो मैं उससे मिलकर खुश था मैं पहली बार ही नीलम से मिला था और उसके बात करने के तरीके से मैं बहुत ज्यादा प्रभावित भी था भाभी ने मेरे बारे में नीलम को बताया, नीलम और मैं एक दूसरे से बात करने लगे मैंने नीलम से पूछा तुम क्या करती हो तो वह कहने लगी मैं एक फैशन डिजाइनर हूं और मुंबई में ही रहती हूं। वह कहने लगी आप कभी मुंबई आएगा तो मुझसे जरूर मिलना, मैंने उसे कहा क्यों नहीं जब मैं मुंबई आऊंगा तो तुमसे जरूर मिलूंगा, वैसे तुम कितने दिनों के लिए घर आई हुई हो तो वह कहने लगी मैं कुछ ही दिनों के लिए आई हूं मैंने सोचा छोटू का जन्मदिन है तो मेरी दीदी से भी मुलाकात हो जाएगी और वैसे भी मेरा घर आना कम ही होता है, मैंने नीलम से कहा तुम शादी के समय भी नहीं आ पाई थी तो वह कहने लगी हां उस वक्त मैं मुंबई में ही थी मैं उस वक्त बहुत बिजी थी इसलिए दीदी की शादी में नहीं आ पाई, मैंने नीलम से कहा चलिए कोई बात नहीं हम लोगों ने साथ में खाना खाया और उसके बाद नीलम भी चली गयी। मैं नीलम की बातों से बहुत प्रभावित था अगले दिन भाभी मुझसे कहने लगे कि कल तो आप नीलम के साथ बहुत देर तक बात कर रहे थे मैंने भाभी से कहा आप शायद मेरी बात करने के तरीके को गलत जगह ले कर जा रही हैं वह कहने लगी नहीं ऐसी कोई बात नहीं है वह कहने लगे यदि ऐसा कुछ है तो आप मुझे बता दीजिए मैंने भाभी से कहा नहीं भाभी ऐसा कुछ भी नहीं है।

भाभी मुझे छेड़ने लगी और उसके बाद मैं भी अपने ऑफिस चला गया मुझे भी कुछ दिनों तक जरूरी काम था इसलिए मेरे पास ज्यादा वक्त नहीं था और एक दिन भैया मुझे कहने लगे कि मैं थोड़ा बिजी हूं तुम आज तुम्हारी भाभी को उनके घर पर छोड़ देना मैंने कहा ठीक है मैं चला जाऊंगा, भैया ज्यादा ही बिजी रहते हैं। मैंने भाभी से कहा कि आप तैयार हो जाइए भाभी तैयार हो गई मैं छोटू और भाभी को लेकर उनके घर पर चला गया मैं ज्यादा देर वहां रुक नहीं पाया क्योंकि मुझे ऑफिस के लिए लेट हो रही थी मैं जैसे ही घर से बाहर निकल रहा था तो मुझे नीलम दिखाई दी वह मुझे कहने लगी आप कहीं जा रहे हैं मैंने कहा हां मैं ऑफिस के लिए निकल रहा था मैं भाभी को छोड़ने आया था क्योंकि भैया के पास समय नहीं था इसलिए मैं ही भाभी को छोड़ने आ गया था। वह कहने लगी आप कम से कम चाय पीकर तो जाते मैंने कहा मैंने चाय पी ली है और मैं अभी चलता हूं शाम के वक्त क्या पता मैं यहां से होता हुआ जाऊं वह कहने लगी चलिए ठीक है यदि आप शाम को आए तो शाम को ही हम लोग मुलाकात करते हैं।

मैं ऑफिस के लिए निकल गया मैं जब ऑफिस के लिए निकला तो रास्ते में गाड़ी का टायर पंचर हो गया और मुझे अपनी कार को वहीं छोड़कर जाना पड़ा मैं जब शाम को घर लौट रहा था तो मैंने सोचा मैं अपनी कार का पंचर लगवा लेता हूं मैं शाम को अपनी कार का पंचर लगवा दिया और वहां से मैं भाभी के घर पर चला आया मैं जब भाभी के घर पर आया तो भाभी कुछ दिनों तक अपने मायके में ही रहने वाली थी क्योंकि वह भी काफी समय से अपने घर पर नहीं गई थी मैंने भाभी को जब यह बात बताई कि सुबह मेरी कार का टायर पंचर हो गया था तो वह कहने लगे कि सुबह सुबह आपको खामा खां परेशानी मोल लेनी पड़ी मैंने भाभी से कहा कोई बात नहीं ऐसा तो हो जाता है। मुझे वहां बैठे हुए 10 मिनट ही हुए थे तब तक मैंने देखा नीलम भी आ गई नीलम मुझे देख कर मुस्कुराने लगी और कहने लगी चलिए आपने अच्छा किया जो आप यहां से होते हुए आ गए आज आप डिनर करके जाइएगा मैंने नीलम से कहा नहीं मैं घर निकल जाता हूं मेरी भाभी कहने लगी नीलम सही कह रही है आप डिनर करके जाइएगा शाम हो चुकी है कुछ ही देर में डिनर करके निकल जाना। मैं छोटू के साथ था तभी भैया का फोन आया भैया मुझे कहने लगे अपनी भाभी को तुमने सुबह छोड़ तो दिया था मैंने भैया से कहा मैंने सुबह भाभी को छोड़ दिया था और उसके बाद मैं वही से ऑफिस निकल गया था भैया कहने लगे चलो ठीक है मैं भी थोड़ी देर में घर लौट आऊंगा मैंने कहा ठीक है वैसे तो मैं अभी भाभी के साथ ही हूं क्या आप भाभी से फोन पर बात करोज तो वह कहने लगे नहीं मैं उससे फोन पर बात कर लूंगा मैंने तो सिर्फ तुम्हें पूछने के लिए फोन किया था फिर भैया ने फोन रख दिया। भाभी मुझसे कहने लगी कि किसका फोन था मैंने भाभी को बताया भैया का फोन था तो वह भी कहने लगी उन्होंने मुझे सुबह से फोन ही नहीं किया है मैंने भाभी से कहा भैया बिजी थे इसलिए आपको फोन नहीं कर पाए। भाभी कहने लगी चलो कोई बात नहीं हम लोगों ने उसके बाद साथ में डिनर किया जब मैं घर जाने लगा तो भाभी मुझे कहने लगी तुम जाते वक्त नीलम को भी उसके घर पर ड्रॉप कर देना।

मैंने भाभी से कहा ठीक है मैं नीलम को छोड़ दूंगा, वह मेरे साथ कार में बैठ गई। जब वह मेरे साथ कार में बैठी थी तो मुझे नहीं मालूम था कि उसकी नजर मुझ पर पहले से ही थी उसे तो आज मौका मिल चुका था। वह बार-बार अपनी गोरी जांघ को मुझे दिखा रही थी जिससे कि मेरे अंदर का जोश और भी ज्यादा बढ जाता। मैंने उसकी जांघ पर अपने हाथ को रखा तो वह मुझे कहने लगी क्या हुआ तुम्हारे अंदर बहुत गर्मी है। मैंने उसे कहा मेरे अंदर तुमसे ज्यादा गर्मी नहीं है हम दोनों की सेक्स करने की इच्छा हो चुकी थी। मैं नीलम को एक खंडहर घर के अंदर ले गया वहा पर कोई भी नहीं था वह मकान पूरी तरीके से खंडहर हो चुका था। मैंने नीलम के कपड़े उतार दिए और नीलम के स्तनो को चाटने लगा मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। जैसे ही नीलम ने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया तो उसे भी अच्छा महसूस होने लगा, मुझे बहुत मजा आने लगा। मैंने नीलम की योनि के अंदर लंड को प्रवेश करवा दिया उसकी योनि से खून आने लगा। जैसे ही उसकी योनि से खून की धार बाहर की तरफ को निकली तो वह चिल्लाते लगी, वहां पर काफी सन्नाटा था इसलिए कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था।

मैं लगातार तेजी से धक्के मार रहा था नीलम भी मेरा साथ देती वह अपनी चूतड़ों को मुझसे मिलाती और कहती तुम्हारे लंड में तो वाकई में गर्मी है। मैंने नीलम से कहा लेकिन तुमने आज मुझसे अपनी चूत मरवाने की कैसे सोची। वह कहने लगी मैं जब तुमसे पहली बार मिली तो तुम्हें देखकर मैं तुम पर फिदा हो गई थी तब से ही मैंने सोच लिया था कि तुम्हारे साथ मुझे सेक्स करना है। मैंने नीलम से कहा तुम तो एक नंबर के ठरकी हो, वह कहने लगी अरे नहीं मुझे तो सेक्स का बड़ा शौक है और सेक्स का कीड़ा मेरे अंदर भरपूर भरा पड़ा है। मैंने उसे कहा लेकिन तुम्हारा फिगर बड़ा ही मेंटेन है। वह कहने लगी फिगर तो मुझे मेंटेन रखना ही पड़ता है वह बहुत ज्यादा खुश हो गई थी और मैं भी बहुत ज्यादा खुश था। हम दोनों उसके बाद वहां से घर लौट आए मैंने नीलम को उसके घर पर छोड़ दिया और मैं अपने घर लौट आया।


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