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सुनीता ने मुझसे चूत मरवाई

Sunita ne mujhse chut marwayi:

hindi sex stories, kamukta मेरा नाम सुरेश है मैं दिल्ली का रहने वाला हूं दिल्ली में ही मेरा जन्म हुआ, मैंने बहुत जल्दी अपनी जिम्मेदारियों को समझ लिया और अपने पिता के साथ में उनके कारोबार में काम करने लगा, मेरे पिताजी की चप्पल की फैक्ट्री है और जिसके सिलसिले में मुझे अन्य राज्यों में भी जाना पड़ता है। दिल्ली में हमारा कारोबार काफी पुराना है इसलिए मेरे पास बहुत सारे कस्टमर अन्य राज्यों से भी आते हैं और ज्यादातर लोग हमारी दुकान से उधार ही सामान ले जाते हैं लेकिन उन लोगों के साथ हमारे रिलेशन बहुत ही अच्छा होता है इसलिए हम लोग उन्हें उधार दे दिया करते हैं और कुछ समय बाद वह लोग हमें पैसे दे देते हैं। इसी सिलसिले में एक दिन मैं दिल्ली से लखनऊ जा रहा था मैंने ट्रेन में रिजर्वेशन करवाने के लिए अपने छोटे भाई को कहा तो वह कहने लगा कि भैया ट्रेन में तो सारी सीट फूल है और ना ही तत्काल में कोई सीट मिल रही है आप एक काम करो बस से ही लखनऊ चले जाओ।

पहले मैं सोचने लगा कि मैं अपनी कार से लखनऊ चला जाता हूं लेकिन मुझे लगा कि कार ले जाना ठीक नहीं रहेगा क्योंकि मुझे नींद बहुत ज्यादा आती है इसीलिए मैंने बस से ही जाने का फैसला कर लिया, मेरे भाई ने मेरे बस की टिकट बुक करवा दी और जब मैं लखनऊ के लिए बस में निकला तो मेरे पापा कहने लगे कि बेटा हो सकता है तुम्हें वहां कुछ दिन रुकना पड़े इसलिए तुम किसी होटल में रूम ले लेना, मैंने पापा से कहा जी पापा जी आप बिल्कुल भी फिक्र ना करें मैं वहां होटल में रूम ले लूंगा। मैंने उस रात बस अड्डे से बस पकड़ ली और मैं बस में बैठ गया मैं जब बस में बैठा तो बस पूरी तरीके से फुल भर चुकी थी मैं भी अपनी सीट में बैठ गया मेरे बगल वाली सीट में एक अंकल बैठे हुए थे वह मुझसे पूछने लगे की बेटा तुम कहां जाओगे? मैंने उन्हें बताया कि मैं लखनऊ जाऊंगा। हम दोनों आपस में बात कर रहे थे तो कंडक्टर पूछने लगा कि बस में कोई और सवारी रह तो नहीं गई है, मेरे बगल में तो अंकल बैठे ही थे इसलिए मैंने कनेक्टर को कोई जवाब नहीं दिया पीछे से किसी व्यक्ति ने आवाज देते हुए कहा कि बस की सारी सीट फुल है, कंडक्टर ने उसके बाद ड्राइवर से चलने के लिए कहा बस बस अड्डे से बाहर निकल चुकी थी।

मैंने कुछ देर तो उन अंकल से बात की और थोड़ी देर बाद मुझे नींद आने लगी, मैंने खाना तो घर में ही खा लिया था इसलिए मुझे बहुत तेज नींद आने लगी मैं अपनी आंख बंद कर के लेट गया, बस को चलते हुए काफी समय हो चुका था और रात भी काफी हो गई थी तभी बस में एक जोरदार झटका लगा मेरी नींद एकदम से टूट गई मैंने आगे देखा तो सब लोग बड़े ही अफरा-तफरी में बस से बाहर निकल रहे थे मैं भी जल्दी से बाहर निकला, मैंने कंडक्टर से पूछा कि आखिरकार क्या हो गया तो कंडक्टर कहने लगा कि पता नहीं बस में क्या दिक्कत आ गई इसलिए ड्राइवर को अचानक से ब्रेक मानना पड़ा। सब लोग ड्राइवर के पास गए और ड्राइवर कहने लगा शायद बस में कोई प्रॉब्लम आ गई है, वहां आसपास कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था मैं सोचने लगा कि पता नहीं अब क्या होगा और जिस जगह पर हम लोग रुके हुए थे वहां पर ना तो मोबाइल के नेटवर्क आ रहे थे और ना ही कुछ दिखाई दे रहा था।

मैंने कंडेक्टर से पूछा कि भाई साहब यहां आस-पास कोई जगह है जहां पर मैं फ्रेश हो जाऊं, कंडक्टर कहने लगा कि यहां से कुछ दूरी पर एक ढाबा है शायद वह खुला हो, मैंने कंडक्टर से पूछा लेकिन क्या बस तब तक ठीक हो जाएगी? कंडक्टर कहने लगा की हम लोग भी वहीं जा रहे हैं क्योंकि यहां पर मोबाइल के टावर नहीं आ रहे हैं इसलिए हमें दूसरी बस को यहां बुलाना पड़ेगा या फिर किसी मैकेनिक को देखना पड़ेगा। मैं भी कंडक्टर के साथ पैदल चल दिया हमारे साथ कुछ लोग और भी थे हम लोग जब वहां पर पहुंचे तो मेरी हालत पसीने से खराब थी क्योंकि हम लोग काफी पैदल चल चुके थे अब मुझे नींद आने का तो कोई सवाल ही नहीं था मैं मन ही मन सोचने लगा कि ना जाने आज यह कैसी घटना घटित हो गई, कंडक्टर कहने लगा कि यदि आप लोगों को कुछ खाना है तो आप लोग यहीं खा लो, मैंने कंडक्टर से पूछा कि क्या आपने फोन कर दिया? वह कहने लगा दूसरी गाड़ी बस कुछ देर में ही आती होगी लेकिन आप लोगों को यहां रुकना पड़ेगा, मैंने उसे कहा मैं यहीं बैठा हुआ हूं, वह कहने लगा कोई बात नहीं आप लोग यहीं रुक जाओ जैसे ही दूसरी गाड़ी आती है तो वह आपको यहां से रिसीव कर लेगी।

मैं पहले तो फ्रेश हुआ मैंने जब अपने फोन को देखा तो उस पर नेटवर्क आने लगे थे मैंने अपने भाई को फोन किया मेरा छोटा भाई कहने लगा कि भैया क्या आप पहुंच गए, मैंने उसे कहा अरे पागल अभी कहां पहुंचा हूं रात को बस खराब हो गई और हम लोग दूसरी बस का इंतजार कर रहे हैं, वह कहने लगा चलो जब आप पहुंच जाओ तो मुझे फोन कर देना, मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हें फोन कर दूंगा और यह कहते हुए मैंने फोन रख दिया मैंने उसे यह भी कह दिया था कि तुम मम्मी-पापा से कुछ भी बात मत कहना। मैंने वहां पर एक दुकान से कॉफी ली मैं कॉफी पीने लगा वहां पर काफी भीड़ होने लगी थी क्योंकि दो तीन बसें भी वहां पर रुकी मैंने आसपास देखा तो काफी भीड़ हो चुकी थी तभी कंडेक्टर ने कहा कि भाई साहब चलिए दूसरी बस आ गई है, मैंने उसे कहा कहां है? उसने मुझे अपने हाथ से इशारा किया मैंने जब उस तरफ देखा तो वहां पर दूसरी बस खड़ी थी मैं जल्दी से दौड़ता हुआ बस में बैठ गया, कनेक्टर कहने लगा कि आप लोग इस बस में बैठ जाइये। कंडेक्टर ने हम सब लोगो को उस बस में बैठा दिया मैं जिस सीट में बैठा था उस सीट में एक महिला बैठी हुई थी वह मुझसे पूछने लगी कि आप लोग कितनी देर से यहां इंतजार कर रहे हैं? मैंने उन्हें बताया मुझे तो यहां काफी देर हो चुकी है।

मैंने उनसे पूछा कि क्या आप पहले वाली बस में ही थी? वह कहने लगी हां मैं पहले वाली बस में ही थी। मैंने जब पीछे पलट कर देखा तो वह अंकल मेरे पीछे वाली सीट में बैठ गए थे, बस अब चलने लगी थी मैंने उन महिला से उनका नाम पूछा उनका नाम सुनीता था। मैंने उनसे पूछा मैडम आप क्या करती हैं तो वह कहने लगी कि मैं स्कूल में अध्यापिका हूं और इस वक्त मैं लखनऊ में ही पोस्टेड हूं मेरा ससुराल दिल्ली में है और मेरा मायका भी दिल्ली में ही है लेकिन मुझे यहां दो वर्ष हो चुके हैं। मैंने उनसे पूछा आपके पति क्या करते है तो वह कहने लगी कि मेरे पति एक बिजनेसमैन है, मैंने उन्हें कहा कि हमारा भी बिजनेस है तो वह मुझसे पूछने लगी कि आपका किस चीज का बिजनेस है, मैंने उन्हें बताया हमारा चप्पलों का कारोबार है, वह मुझेसे मजाकिया अंदाज में कहने लगे कि चलिए तब तो आप से ही मुझे चप्पल ऑर्डर करवानी पड़ेगी, मैंने उन्हें कहा क्यों नहीं मैडम आप मेरा नंबर ले लीजिए आपको जब भी जरूरत हो तो आप मुझे फोन कर दिया कीजिएगा। उनके साथ मैं बड़े ही मजाक के अंदाज में बात करने लगा मुझे अब नींद तो बिल्कुल भी नहीं आ रही थी मैंने उनसे पूछा कि क्या आपको नींद आ रही है? वह कहने लगी नहीं मुझे भी नींद नहीं आ रही, अब तो मैं यही सोच रही हूं कि कैसे मैं लखनऊ पहुंच जाऊं। मेरा हाथ बार-बार उनके स्तनों पर टकरा रहा था और वह भी कुछ नहीं कह रही थी मैंने जब अपने हाथ को उनकी जांघ पर रखा तो वह मचलने लगी मैंने उनकी जांघ को दबाना शुरू कर दिया बस की लाइट बुझी थी आसपास के सब लोग सो चुके थे। मैं और सुनीता एक दूसरे के होठों को किस करने लगे रात भर तो हम लोग एक दूसरे को सिर्फ किस ही कर पाए लेकिन जब सुबह हम लोग लखनऊ पहुंचे तो वह मुझे कहने लगी चलिए आज आप मेरे साथ ही रुक जाइए।

मैंने उन्हें कहा नहीं मैं होटल में रूम ले लूंगा लेकिन सुनीता को तो मेरे लंड को अपनी चूत में लेना था इसलिए वह मुझे अपने साथ अपने घर ले गई क्योंकि वह अकेली रहती है इसलिए मेरे लिए भी यह अच्छा मौका था जैसे ही हम दोनों उसके घर पर पहुंचे तो मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसके बदन को मैं महसूस करने लगा। उसके बदन को मैं महसूस करता मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया था मैने अपने लंड को निकाल कर उसके मुंह में डाल दिया। वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग कर रही थी मुझे बहुत मजा आ रहा था मैंने काफी देर तक उससे अपने लंड को चुसवाया जब मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया तो उसके मुंह से सिसकिया निकलने लगी। कुछ देर तक तो मैं उसे घोड़ी बनाकर चोदता रहा परंतु जब उसने मुझे कहा मुझे तुम्हारे ऊपर आना है तो मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को अपनी चूत मे ले लो।

वह मेरे ऊपर लेट चुकी थी उसने मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर डाल दिया वह अपनी चूतडो को ऊपर नीचे करने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया। वह अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे करती जाती मुझे बहुत अच्छा महसूस होता वह अपनी चूतडो को तेजी से ऊपर नीचे करती। मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर गिर गया वह मुझे कहने लगी तुम्हारा वीर्य तो बड़ी जल्दी बाहर निकल गया। मैंने उससे कहा तुम्हारा शरीर कम हॉट नहीं है तुम्हारी इतनी बड़ी गांड है तुम्हारी गांड देखकर मेरा वीर्य वैसे ही गिर गया था। वह मुझे कहने लगी मेरे पति तो मेरी गांड के भी मजे लेते हैं जब उसने मुझसे यह बात कही तो मैंने अपने लंड को हिलाते हुए दोबारा से खड़ा कर लिया क्योंकि मैं यह मौका गवाना नहीं चाहता था। मैंने अपने लंड की अच्छे से तेल से मालिश कर ली जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी गांड के अंदर डाला तो वह चिल्ला उठी मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के मारता उसके साथ मुझे सेक्स करने का बड़ा ही अच्छा मौका मिल गया और मैने भरपूर मजे लिए।


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